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पाकुड़ डीसी की PMO में शिकायत- डीसी के तानाशाही रवैये से विकास कार्य ठप, हो न्यायिक जांच

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Ranchi/Pakur : पाकुड़ डीसी दिलीप कुमार झा के अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं. तमाम तरह के आरोप उनपर लग रहे हैं. मुख्यमंत्री जनसुनवाई से लेकर पीएमओ तक उनके खिलाफ शिकायत हो रही है. उनका अपने अधिकारियों और दूसरे लोगों को अपशब्द कहते हुए वीडियो वायरल हो रहा है. इस बार पाकुड़ के किसी अमित कुमार दास ने प्रधानमंत्री कार्यालय से पाकुड़ डीसी दिलीप कुमार झा की शिकायत की है. पीएमओ से की गयी शिकायत में शिकायतकर्ता का कहना है कि डीसी दिलीप कुमार झा के निजी स्वार्थ और तानाशाही रवैये की वजह से जिले में विकास का काम ठप पड़ चुका है. विस्थापितों की समस्या जस की तस पड़ी हुई है. जिले में घूसखोरी चरम पर है. ईमानदारी के नाम पर भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है. शिकायत करनेवाले ने इन सबकी न्यायिक जांच की मांग की है.

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आरोप नंबर एक : अवैध खनन को देते हैं संरक्षण

पाकुड़ जिला के पाकुड़िया थाना अंतर्गत खागाचुआं मौजा में काफी बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर उत्खनन हो रहा है. आरोप लगाया जा रहा है कि यह काम सहायक खनन पदाधिकारी सुरेश शर्मा और डीसी दिलीप कुमार झा के इशारे पर हो रहा है, जिससे करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व की क्षति हो रही है. इस अवैध उत्खनन का मुख्य सरगना दुमका जिले का श्याम कुमार नारनोली है, जो खुद और अपने गुर्गे के माध्यम से खागाचुआं में करीब 15-20 जगहों पर अवैध उत्खनन कर रहा है. जब इस बात की जानकारी स्थानीय लोगों को हुई और चर्चा का विषय बना, तो आनन-फानन में जिला टास्क फोर्स ने छापामारी की. छापामारी के दौरान बड़े पैमाने पर हाईवा, पोकलेन, जेसीबी को जब्त किया गया. मामले में सहायक खनन पदाधिकारी ने एक सुनियोजित तरीके से पत्थर माफिया को बचाने के उद्देश्य से अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज किया. लेकिन, अवैध खनन को लेकर अलग से कोई कांड दर्ज नहीं किया गया. इसके कारण अब तक सरकार के राजस्व की भरपाई नहीं हो पायी है और अवैध उत्खननकर्ता सरकार को करोड़ों का चूना लगातार खुलेआम लगा रहे हैं.

आरोप नंबर दोः विधायक पर दबाव बनाया

खागाचुआं में किये जा रहे हैं अवैध उत्खनन को लेकर स्थानीय विधायक साइमन मरांडी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में सहायक खनन पदाधिकारी सुरेश शर्मा और डीसी दिलीप झा के विरुद्ध अवैध उत्खनन एवं परिवहन कराने तथा पत्थर माफिया श्याम कुमार नारनोली के साथ दोनों पदाधिकारी की संलिप्तता के बारे में बताया और जांच की मांग की. चिट्ठी में और भी कई जगहों पर अवैध उत्खनन-परिवहन होने का उल्लेख किया गया है. इस बात की भनक जब पाकुड़ डीसी को हुई, तो उन्होंने सहायक खनन पदाधिकारी सुरेश शर्मा को मामला रफा-दफा करने के काम में लगा दिया. जब विधायक साईमन मरांडी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे, उसी दौरान उनसे विधायक के लेटरपैड पर विधायक पर दबाव बनाकर मनचाही बात लिखवा ली गयी और विधायक का साइन करा लिया गया.

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आरोप नंबर तीनः तानाशाही रवैया

पाकुड़ के डीसी दिलीप कुमार झा के तानाशाही रवैये से वहां के लोग काफी नाराज हैं. तानाशाही रवैये के ही कारण विस्थापित कोयला क्षेत्र अमड़ापाड़ा के लोगों ने दो-तीन बार उपायुक्त की बैठक का बहिष्कार कर दिया. लोगों का कहना है कि पदाधिकारियों ने कंपनी से मोटी रकम ले ली है और जनता की मांगों को दरकिनार किया जा रहा है. लोग डीसी दिलीप कुमार झा के ऐसे रवैये को तानाशाही करार दे रहे हैं.

आरोप नंबर चारः अली अकबर नाम की कंपनी से है नजदीकी

डीसी दिलीप कुमार झा पर यह भी आरोप है कि अली अकबर पत्थर माफिया, जो स्थानीय विधायक आलमगीर आलम के काफी करीबी माने जाते हैं, उनके साथ डीसी साहब की गहरी सांठगांठ है. अली ब्रदर्स एवं अजहर एंड कंपनी की गाड़ियों से सरकारी बालू की ढुलाई की जा रही है. लोगों का कहना है कि अली अकबर से करीब एक करोड़ लेकर डीसी पाकुड़ ने अवैध उत्खनन एवं परिवहन की खुली छूट दे रखी है. खुली छूट की वजह से अली एंड ब्रदर्स और अजहर एंड कंपनी की गाड़ियों को बिना खनन चालान के ओवरलोड पुलिस पकड़ती है, तो तुरंत थाना में सहायक खनन पदाधिकारी सुरेश शर्मा पहुंचकर गाड़ी का मामूली फाइन काटकर थाना से चलता कर देते हैं. इसके सारे प्रमाण थाना में उपलब्ध हैं.

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आरोप नंबर पांचः खास कंपनी पर मेहरबानी

डीसी पाकुड़ पर आरोप है कि वह स्थानीय कोयला ट्रांसपोर्टरों को वैल्यू नहीं देते हैं. आरोप लगाया जा रहा है कि डीसी ने कोलकाता के एक बड़े कारोबरी सोनार बांग्ला से सांठगांठ कर करीब 400 हाईवा चलाने के लिए मोटी रकम ली है. इसलिए स्थानीय लगातार बाहर की कंपनी का विरोध कर रहे हैं.

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आरोप नंबर छह : विस्थापितों को मैनेज करने के नाम पर डील

डीसी पाकुड़ पर आरोप है कि उन्होंने कोल कंपनी बीजीआर, जिसे रेडी कंपनी के नाम से भी जाना जाता है, उस कंपनी से विस्थापितों को मैनेज करने के नाम पर करीब चार करोड़ रुपये की डील हुई है. यह बात पाकुड़ बाजार एवं आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. इसी वजह से विस्थापित परिवार डीसी की बैठक का विरोध कर रहे हैं.

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