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पाकुड़ में डीसी ने बनायी ऐसी व्यवस्था कि बालू माफिया के हो गए व्यारे-न्यारे

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Ranchi/Pakur: संथाल परगना का एक ऐसा छोटा सा जिला पाकुड़, जिसका बॉर्डर बांग्लादेश को छूता हैं. लेकिन इस छोटे से जिले को ओडीएफ घोषित करवाने में पाकुड़ प्रशासन को इतनी जल्दी है कि सारे नियम-कानून को ताक पर रख कर काम किया जा रहा है. डीसी दिलीप झा के फैसलों का हवाला देते हुए प्रशासन से मिलकर बालू माफिया जिले भर में बालू का अवैध धंधा कर रहे हैं.

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इतना ही नहीं व्यवस्था ऐसी बहाल की गयी है कि पुलिस चाह कर भी इस गोरखधंधे पर किसी तरह की नकेल नहीं कस सकती है. मामले को लेकर मीडिया में लगातार रिपोर्टिंग हो रही है. लेकिन इससे पाकुड़ प्रशासन और डीसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, पाकुड़ से रोजाना करीब 200 बालू ट्रैक्टर बॉर्डर पार कर बांग्लादेश पहुंच रहा है. माफिया लाखों कमा रहे हैं और प्रशासन कह रहा है कि शौचालय का काम जोरों पर है.

स्वच्छ भारत के नाम पर नदी हो रहे साफ

पूरे देश में बालू को लेकर एक कानून चल रहा है. MOEF (Ministry of Environment & Forests) के नियमों के मुताबिक, मॉनसून तक किसी भी नदी एरिया में 15 अक्टूबर तक बालू का उठाव बंद है. निर्माण कार्य में वही बालू का इस्तेमाल हो सकता है जो कहीं स्टॉक है. उसके लिए भी लाइसेंस का होना जरूरी है. लेकिन इन सारे नियमों को पाकुड़ में ताक पर रख कर काम किया जा रहा है. इसी नियम का फायदा उठा कर पाकुड़ में बालू का खेल जोरों पर है.

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सुबह होते ही महेशपुर प्रखंड के बांसलोई नदी से बालू का उठाव धड़ल्ले से शुरू हो जा रहा है. जो रात तक होता रहता है. यह MOEF के नियमों की सीधी अनदेखी है. लेकिन इस बात से पाकुड़ प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता है. ब्लॉक लेवल से लेकर पाकुड़ समाहरणालय तक सारी चीजें सेट हैं. बालू आराम से लोड होकर बिना किसी रोक-टोक के बंगलादेश पहुंच जा रहा है.

पुलिस से सारे अधिकार छीने

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हालांकि खनन विभाग के किसी भी वाहन की जांच की इजाजत पुलिस को नहीं है. लेकिन जहां तक MOEF कानून की बात है. पुलिस को पावर है कि वो बालू से लदे वाहनों की जांच करें. पुलिस ने ऐसा करना शुरू भी किया. लेकिन पाकुड़ प्रशासन ने बड़ी ही चालाकी से पुलिस के हाथ-पैर बांध दिए. एसडीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुलिस पदाधिकारियों को साफ कहा गया कि वो बालू के लदे किसी भी वाहन की जांच कतई नहीं करेंगे. क्योंकि बालू स्टॉक एरिया से उठकर शौचालय निर्माण स्थल पर जा रहा है.

डीसी का हवाला देते हुए, एसडीएम ने यह सरकारी फरमान पुलिस पदाधिकारियों को सुना दिया. इसके बाद से पुलिस के सामने नदी से लाद कर बालू सीमा पार पहुंच जा रहा है. और प्रशासन लोगों को कहते फिर रहा है कि मोदी जी का स्वच्छ भारत का सपना साकार हो रहा है.

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डीसी साहब आपको इस वीडियो में क्या दिख रहा है

नदी से बालू उठाव के सैकड़ों वीडियो पाकुड़ और आस-पास के इलाकों में वायरल हैं. वीडियो और फोटो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे दिनदहाड़े बालू का उठाव किया जा रहा है. कैसे ट्रैक्टरों से बालू ढो-ढोकर बांग्लादेश पहुंचाया जा रहा है. कैसे बालू माफिया और प्रशासन मिलकर MOEF के नियमों की धज्जी उड़ा रहे हैं. इतने वीडियो के बावजूद प्रशासन का ये कहना कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय का निर्माण के लिए बालू उठाया जा रहा है, यह कहना सरासर बेईमानी है.

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