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चार दिनों में ही बदल जाता है पाकुड़ डीसी का फैसला, रसूख वाले को दिया बार लाइसेंस दूसरे को कहा नो

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Ranchi/Pakur: एक कहावत है “एक आंख में काजल और दूसरे में सुरमा” इसी कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं पाकुड़ के डीसी दिलीप कुमार झा. पाकुड़ में ऐसी व्यवस्था चलाई जा रही है जिससे साबित होता है कि अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं. एक कमजोर आदमी को किसी काम के लिए मना कर दिया जाता है. वहीं दूसरे को जो कि एक दबंग शख्स है, उसे काम करने की अनुमति दे दी जाती है.

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जी हां, बिल्कुल ऐसा हो रहा है. पाकुड़ के डीसी दिलीप कुमार झा ने महज चार दिनों में बार और रेस्टोरेंट के लाइसेंस के लिए दो अलग-अलग फैसले किए. पहला फैसला 27 अगस्त 2018 को करते हुए बार और रेस्टोरेंट के लाइसेंस के लिए आये एक व्यवसाई के आवेदन पर लिखा कि पाकुड़ जिला इसके लायक नहीं है. जब भाजपा में खासा दखल रखने वाले एक व्यक्ति ने बार और रेस्टोरेंट के लाइसेंस के लिए आवेदन दिया तो एक सितंबर 2018 को इसकी अनुशंसा डीसी ने कर दी.

27 अगस्त का फैसला

27 अगस्त 2018 को पाकुड़ के डीसी में उत्पाद आयुक्त झारखंड को एक चिट्ठी लिखी. उन्होंने पाकुड़ प्रखंड के तिलभीठा निवासी शंकर घोष के लिए रेस्टोरेंट और बार की अनुज्ञप्ति पर अपनी नकारात्मक रिपोर्ट दी. उन्होंने तर्क दिया कि पाकुड़ ना तो पर्यटक क्षेत्र है, और ना ही एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित है. इसलिए यहां पर कभी भी बार और रेस्टोरेंट नहीं खोले जा सकते.

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उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले कभी भी बार और रेस्टोरेंट यहां नहीं खोला गया है. इसलिए अब नया बार रेस्टोरेंट खोलना सही नहीं होगा. उनका कहना था कि वर्तमान में शराब की दुकानें सरकार के माध्यम से संचालित हैं. सालों से शराब के धंधे में लिप्त ठेकेदार शराब माफिया समानांतर व्यापार चलाने के लिए बार और रेस्टोरेंट का लाइसेंस लेने के लिए प्रयासरत है. इस जिले में पर्यटक भी नहीं आते हैं. और यहां बार की परंपरा भी नहीं है. इसलिए लाइसेंस देने पर यह संशय बना रहेगा, लाइसेंस लेने वाले अनुज्ञप्ति शुल्क की कैसे भरपाई करेंगे. उन्हें बार एवं रेस्टोरेंट का लाइसेंस देना कतई उचित नहीं है. इसकी आड़ में ठेकेदार और शराब माफिया समानांतर व्यापार चलाकर सरकारी व्यवस्था को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं. इन्हीं लाइसेंस नहीं दिया जा सकता.

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एक सिंतबर का फैसला

दूसरा फैसला एक सितंबर 2018 को पाकुड़ के डीसी ने लिया. 27 अगस्त की रिपोर्ट के ठीक उलट नई अनुशंसा की. इसमें पाकुड़ के कलपाड़ा स्थित होटल आरके पैलेस में के संचालक विरेंद्र कुमार पाठक के लिए होटल में ही बार और रेस्टोरेंट की अनुशंसा कर दी. यह अनुशंसा भी उन्होंने उत्पाद आयुक्त झारखंड को की. अनुशंसा पत्र पर उन्होंने बताया कि महेशपुर अंचल में अवर निरीक्षक उत्पाद और एसडीओ पाकुड़ से विधि व्यवस्था पर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिया जा चुका है. बिल्डिंग विभाग पाकुड़ एक्सक्यूटिव इंजीनियर होटल के नक्शे को सही पाया है. इसलिए इस होटल में बार एवं रेस्टोरेंट खोलने की अनुशंसा की जाती है.

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इस बीच लोगों का कहना है कि भाजपा में विरेंद्र कुमार पाठक की पहुंच ऊंची रहने की वजह से पाकुड़ डीसी ने ऐसा फैसला लिया. लेकिन सोचने वाली बात यह है कि चार दिन में ही कोई उपायुक्त अपने ही फैसले को कैसे बदल सकता है.

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