
Chhaya
Ranchi : 6 जनवरी 2021 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने त्रिपक्षीय समझौता से बाहर निकलने की घोषणा की. राज्य कैबिनेट में इस पर सहमति बनी. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा था कि केंद्र सरकार राज्य मद से राशि में कटौती कर रही है. कटौती डीवीसी के भुगतान के लिये आरबीआई कर रही है. राज्य को इससे नुकसान हो रहा है. संभावना व्यक्त की गयी थी कि त्रिपक्षीय समझौता से हटने के बाद आरबीआई राज्य मद से राशि की कटौती नहीं कर सकती है. जबकि इसके बाद भी आरबीआई ने 13 जनवरी 2021 को राज्य मद से 714 करोड़ राशि की कटौती की. इसके पहले 16 अक्टूबर 2020 को 1417 करोड़ रूपये की कटौती आरबीआई ने की. वहीं, बीते सितंबर और आगामी दिसंबर को भी आरबीआई की ओर से कटौती की जानी है. लेकिन राज्य उर्जा विभाग की ओर से मामले में रिक्वेस्ट लेटर केंद्र को भेजा गया, जिसके बाद सिंतबर में होने वाली कटौती नहीं हुई. संभावना है कि आरबीआई की ओर से दिसंबर में फिर से राशि कटौती की जायेगी.
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दो महीने में कटने है 1125.845 करोड़
कुछ समय पहले नीति आयोग और राज्य सरकार के बीच बैठक हुई थी. जिसमें ये बात सामने आयी कि आरबीआई राज्य मद से राशि कटौती करेगी. जिसके मुताबिक सितंबर में 1125.845 करोड़ और दिसंबर में 1125.845 करोड़ राशि काटी जायेगी. हालांकि राज्य सरकार केंद्र को रिक्वेस्ट लेटर के जरिये इसे नहीं काटने का आग्रह कर सकता है. फिलहाल राशि काटी नहीं गयी है. लेकिन मामला उच्च अधिकारियों के पास है.
सिंतबर में भेजा गया रिक्वेस्ट लेटर
वरीय अधिकारियों से जानकारी मिली कि सिंतबर में आरबीआई को राज्य सरकार ने रिक्वेस्ट लेटर भेजा था. जिसमें राज्य मद से कटौती नहीं करने की बात कही गयी. जिसके बाद केंद्र सरकार की ओर से कटौती नहीं हुई. ये कटौती पिछले कुछ सालों से डीवीसी के बकाया के लिये की जा रही है. जो लगभग 5000 करोड़ रुपये थी. ऐसे में दो बार केंद्र सरकार कटौती कर चुकी है. जिसके बाद, वर्तमान में लगभग 2300 करोड़ बकाया है. जिसकी कटौती की तैयारी जारी है. बता दें, जनवरी में आरबीआई की ओर से किये कटौती के बाद उर्जा विभाग की ओर डीवीसी को समय पर भुगतान किया जा रहा है. ऐसे में पहले से जो राशि बकाया है कटौती उसके लिये की जायेगी.
हर महीने 155 करोड़ की बिजली खरीद
पिछले साल ऊर्जा विभाग ने छह ग्रिड और संचरण लाइनों का काम शुरू किया है. इसमें से दो ग्रिड सब स्टेशन डीवीसी कमांड एरिया में थे. जिसमें जसीडीह और बिरनी ग्रिड भी शामिल रहें. ग्रिड के शुरू होने के बाद डीवीसी से 600 मेगावाट की जगह फिलहाल 465 मेगावाट बिजली ली जा रही है. ऐसे में झारखंड को डीवीसी से लगभग 135 मेगावाट बिजली खरीद से निजात मिली. साथ ही बिजली खरीद पर होने वाला खर्च भी कम हुआ. पहले यह रकम 225 करोड़ होती थी, जो घटकर 155 करोड़ रह गयी है.
क्या है त्रिपक्षीय समझौता
डीवीसी से बिजली खरीद के लिये वर्ष 2017 में केंद्र सरकार, आरबीआई और झारखंड सरकार के बीच समझौता हुआ था. जिसके मुताबिक राज्य सरकार की ओर से बिजली खरीद का पैसा डीवीसी को नहीं देने पर, आरबीआई केंद्र सरकार के आदेश पर राज्य मद से कटौती कर सकती है. त्रिपक्षीय समझौता से बाहर निकलने की घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने ने कहा था कि डीवीसी का बकाया पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के समय से है. लेकिन तब केंद्र सरकार ने राज्य मद से राशि की कटौती नहीं की.
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