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देश में 374 और झारखंड में 12 जिले ऐसे जो शैक्षणिक रूप से पिछड़े

Ranchi : केंद्र और राज्य की सरकारों के तमाम कोशिशों और हजारों करोड़ों रुपये के शिक्षा विभाग का बजट होने के बाद भी राज्य में 374 जिले ऐसे हैं जो शैक्षणिक रुप से पिछड़े हुए हैं. यहां अब भी मुकम्मल शिक्षा की व्यवस्था नहीं है. वहीं झारखंड की बात करें तो यहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा वाला जिला सहित 11 जिले शैक्षणिक रुप से पिछड़े हैं. बताते चलें कि राज्य में शैक्षणिक दशा को सुधारने के लिए कई तरह की योजनाएं चल रही हैं. जबकि यहां शिक्षा का बजट लगभग तीन हजार करोड़ रुपये के करीब है. यह जानकारी लोकसभा में सौंपी गयी रिपोर्ट में है.

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झारखंड के शैक्षणिक रुप से पिछड़े जिले

देवघर, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, कोडरमा, पाकुड़, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम और साहेबगंज. बताते चलें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन साहेबगंज के बरहेट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं.

क्यों हैं ये पिछड़े जिले

बताते चलें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा गठित एक विशेष समिति ने सकल नामांकन अनुपात (जीईआर), महाविद्यालय-जनसंख्या अनुपात और प्रति महाविद्यालय औसत नामांकन के आधार पर देश में 374 जिलों को शैक्षणिक रुप से पिछड़े जिले के रुप में पहचान की है.

संचालित योजनाओं से भी नहीं हो रहा सुधार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक बेहतरीन शैक्षणिक माहौल के लिए समग्र शिक्षा अभियान, निष्ठा, निपुण भारत और परख जैसी योजनाएं चल रही हैं. ये योजनाएं स्कूली स्तर पर चल रही हैं. वहीं कॉलेज और विवि स्तर पर 9 विभिन्न तरह की योजनाएं संचालित हो रही हैं. इसके बाद भी इन जिलों के शैक्षणिक माहौल में सुधार नहीं हो पा रहा है.

राज्य और यूटी की स्थिति

अंडमान-निकोबार : 02

आंध्र प्रदेश : 11

अरुणाचल प्रदेश : 11

असम : 12

बिहार : 25

छतीसगढ़ : 15

दादर-नगर हवेली : 01

दमन-दीव : 02

गुजरात : 20

हरियाणा : 07

हिमाचल प्रदेश : 04

जम्मू-कश्मीर : 11

झारखंड : 12

कर्नाटक : 20

केरल : 04

लक्ष्यद्वीप : 01

मध्य प्रदेश : 39

महाराष्ट्र : 07

मेघालय : 05

मिजोरम : 07

नागालैंड : 01

ओडिशा : 18

पुदुचेरी : 01

राजस्थान : 30

सिक्किम : 04

तमिलनाडू : 27

त्रिपुरा : 04

उत्तर प्रदेश : 41

उत्तराखंड : 02

पश्चिम बंगाल : 17

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