
New Delhi : चीन के प्रति झुकाव रखने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका लगा है, आज उनके सामने सरकार बचाने के चुनौती थी लेकिन वो विश्वास मत बुरी तरह से हार गए.
केपी शर्मा ओली को अपने विश्वास मत के पक्ष में 93 वोट मिले मिले हैं, जबकि विपक्ष में 124 वोट गिरे. कुल 232 सांसदों ने मतदान किया. 275 सदस्य प्रतिनिधि सभा में चार सीट ख़ाली हैं.
इसे भी पढें :मनरेगा योजना के तहत मिला था कुआं, खुदाई के क्रम में धंसा, एक की मौत
सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों ने भी नहीं दिया वोट
38 महीने तक सरकार चलाने वाले केपी ओली को अब प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी. सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों ने भी केपी ओली को वोट नहीं दिया, जिसकी वजह से वह संसद में विश्वासमत हार गए. केपी ओली राष्ट्रपति बिध्या देवी भंडारी को अपना इस्तीफा सौंपेंगे. एक हफ्ते के अंदर नई सरकार का गठन होने की उम्मीद है.
इसे भी पढें :अच्छी खबरः 14 मई से 18 प्लस का वैक्सीनेशन
चीन के इशारे पर भारत से सम्बन्ध खराब किये
आपको बता दें कि चीन की चाल में फंसकर केपी ओली फिलहाल भारत से भी सम्बन्ध खराब कर चुके हैं और उधर चीन ने भी पीठ में छूरा घोंप दिया है, जी हाँ! ओली के राज में नेपाल की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, नेपाल के कई गावों पर चीन ने कब्जा भी कर लिया है. और अब ओली की कुर्सी भी चली गई.
ओली ने चीन के इशारे पर भारत से अपने सम्बन्ध खराब कर लिए जिसका नतीजा अब पूरे नेपाल की जनता को भुगतना पड़ रहा है. भारत और नेपाल को सदियों से मिली-जुली संस्कृति एक करती रही है.
दोनों देशों के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता इतना गहरा कि कभी लगा ही नहीं कि दो देश हैं. परन्तु हाल के दिनों में नेपाली सरकार ने भारत के साथ संबंधों में खटास पैदा कर दी है.
इसे भी पढें :बक्सर के चौसा में गंगा नदी में तैर रहीं 45 लाशें, इलाके में सनसनी




