
Ranchi : सांसद निशिकांत दुबे ने राज्य में ऑक्सीजन प्लांट और इसकी सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार की सराहना की है. उनके मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने से पहले ही केंद्र सरकार ने झारखंड के लिए मदद को हाथ बढ़ा दिये थे. केंद्र की पहल पर ही राज्य को 36 ऑक्सीजन प्लांट मिल सके हैं. सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य मंत्री या किसी अन्य के स्तर से केंद्र सरकार पर कोरोना काल में ऑक्सीजन सुविधाओं को लेकर अनावश्यक बातें की जा रही हैं. पीएम मोदी की पहल पर राज्य में पर्याप्त संख्या में अब ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध है जो संक्रमितों को राहत पहुंचा रही है. राज्य सरकार को चाहिए कि वह पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटरों के उपयोग के लिए तकनीशियनों की नियुक्ति की दिशा में पहल करे. साथ ही संभावित तीसरी लहर के हिसाब से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करे.
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केंद्र ने दी है भरपूर मदद
निशिकांत दुबे के अनुसार कोविड-19 इस देश की अब तक की सबसे भयानक महामारियों में से एक है. पूरी दुनिया इस बात से सहमत है कि पीएम मोदी की दूरदृष्टि और उनकी दृढ़ प्रतिक्रिया के कारण ही यह देश अब तक कोविड को नियंत्रण में रखने में सफल रहा है. आप या आपके सलाहकार महामारी के बारे में गंभीर नहीं हैं या वे इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं. केंद्र सरकार ने कोविड परीक्षण, टीका, दवाईयां, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की आपूर्ति और अन्य स्तर पर मदद को उम्मीद से बेहतर मदद दी है. हाल ही में झारखंड में कोविड की स्थिति के बारे में पूछताछ करने के लिए पीएम ने आपसे संपर्क किया पर आपने उनके खिलाफ निंदनीय बयान दिया.
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दूसरी लहर शुरू होने से पहले ही प्रधानमंत्री ने झारखंड में चार ऑक्सीजन संयंत्रों को मंजूरी दी थी. पर सरकार की अक्षमता के कारण इन्हें कभी स्थापित नहीं किया गया था. 4 स्थानों पर ऑक्सीजन संयंत्र स्वीकृत किये गये हैं-रिम्स रांची, सदर अस्पताल रांची, एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर, पीएमसीएच धनबाद. पर इसमें काम नहीं होने से गरीब लोग ऑक्सीजन के लिए परेशान होते रहे. दरअसल, पिछले महीने प्रधानमंत्री ने झारखंड के हर जिले में 21 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की मंजूरी दी थी. इसके अलावे उन्होंने देवघर एम्स के लिए भी एक को मंजूरी दे दी है. वहां केंद्र सरकार अगले सप्ताह के अंत तक ऑक्सीजन प्लांट को पूरा करने के लिए दिन-रात काम कर रही है. कोल इंडिया ने संथाल परगना को 15 करोड़ से ज्यादा की मदद कोविड सुविधाएं सृजित करने के लिए दी थी. वह सीसीएल, ईसीएल और कोल इंडिया के साथ मिलकर झारखंड के विभिन्न स्थानों पर दस अतिरिक्त ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना बना रही है. इस तरह से मोदी के गतिशील नेतृत्व में केंद्र ने राज्य को कुल 36 ऑक्सीजन प्लांट दिये.
मैनपावर की कमियां हों दूर
राज्य में प्रधानमंत्री द्वारा स्वीकृत वेंटिलेटर के संचालन के लिए तकनीशियनों की नियुक्ति पर सरकार काम करे. राज्य में सरकार हर दिन नई कोविड परीक्षण सुविधाओं का उद्घाटन कर रही है पर दुखद वास्तविकता यह है कि झारखंड में कोई सूक्ष्म जीवविज्ञानी नहीं है. इसके कारण लोगों को अपने आरटीपीसीआर परिणाम वापस पाने के लिए 7 से 10 दिनों के बीच इंतजार करना पड़ता है. जल्द से जल्द एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट को नियुक्त करें. इस साल के अंत में भारत में तीसरी लहर आ सकती है. इसके लिये हर बड़े अस्पताल और जिला मुख्यालय में बच्चों के लिए एक विशेष विंग बनाया जाये.
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