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एक सप्ताह से नहीं मिल रहा आदमखोर तेंदुआ का लोकेशन, वन विभाग का बंद हुआ तलाश अभियान

Palamu : पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिले के रमकंडा, भंडरिया, रंका व चिनियां के क्षेत्र में तीन बच्चों व पशुधन को मारनेवाले आदमखोर तेंदुआ का पिछले एक सप्ताह से लोकेशन गायब हो जाने के बाद से वन विभाग ने तेंदुआ की तलाश अभियान को बंद कर दिया. वन विभाग को अब उसके नये लोकेशन का इंतजार है. गढ़वा दक्षिणी वन क्षेत्र वाले इलाकों में अब उसका लोकेशन मिलने के बाद वन विभाग उसे ट्रेंकुलाइज करने का अभियान शुरू करेगा. पिछले दिनों बैरिया-कुशवार क्षेत्र से सीधे दोबारा चिनिया के हेताड़कला पहुंचने के बाद पिछले 25 जनवरी से विभाग को तेंदुए का लोकेशन नहीं मिला.

ऐसे में वन विभाग सहित हैदराबादी शूटर नवाब शपथ अली खान व संजय डुमरी नेशनल पार्क की एक्सपर्ट की टीम को शिथिल होना पड़ा. इसी बीच शूटर नवाब शपथ अली खान व एक्सपर्ट की टीम फिलहाल वापस लौट गयी. हालांकि वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार तेंदुआ का लोकेशन मिलने के बाद फिर से यह अभियान शुरू किया जायेगा. उल्लेखनीय है कि बैरिया-कुशवार के जंगल को सेफ जोन बना चुका आदमखोर तेंदुआ करीब 10 दिन पहले चिनिया के हेताड़कला क्षेत्र में दोबारा पहुंच गया. यहां पशुधन सहित बकरियों को मारने के बाद शूटर व एक्सपर्ट की टीम बैरिया कुशवार को छोड़ चिनिया क्षेत्र में उसे कैद करने और ट्रेंकुलाइज के अभियान में जुट गयी. वहीं लेकिन तेंदुआ बकरियों का शिकार करता रहा. इसी बीच 25 जनवरी से वह अचानक उस क्षेत्र से गायब हो गया.

एक तस्वीर तक कैमरे में नहीं हुई कैद

रमकंडा के कुशवार में 28 दिसंबर की रात हरेंद्र घासी नामक बच्चे को तेंदुआ द्वारा मारे जाने के बाद वन विभाग की टीम ने रमकंडा के कुशवार, बलिगढ़, तेतरडीह, बिराजपुर, सिंजो व बैरिया के जंगली क्षेत्रों में 50 ट्रैपिंग कैमरा लगाया. लेकिन एजाईल प्रवृति का यह तेंदूआ 50 कैमरों की आंखों को चकमा देकर चिनिया पहुंच गया. इस क्षेत्र में भी विभाग ने ग्रिड बनाकर कैमरा लगाया, लेकिन तेंदुआ की एक तस्वीर कैद नहीं हुई. हालांकि शूटर को सर्च लाइट में तेंदुआ नजर आया. वहीं कई जगहों पर उसके फुटमार्क मिले.

मारने के लिए दोबारा भेजी जायेगी रिपोर्ट

इधर सीधे तौर पर तेंदुआ को मारे जाने का आदेश समाप्त होने के बाद वन विभाग पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ शशिकर सामंतों को दोबारा रिपोर्ट भेजेगी. पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ की ओर से गठित समिति इसकी रिपोर्ट करेगी. उल्लेखनीय है कि तेंदुआ को सीधे तौर पर मारे जाने का आदेश 31 जनवरी को समाप्त हो चुका है. हालांकि उसे ट्रेकुलाइज करने का आदेश अभी तक जारी है.

दोबारा अभियान शुरू किया जायेगा : सीएफ

गढ़वा वन संरक्षक सह उतरी क्षेत्र के डीएफओ दिलीप यादव ने बताया कि शूटर व एक्सपर्ट टीम से वन विभाग के कर्मियों ने भी बहुत कुछ सीख लिया है. शूटर के आने के बाद दोबारा अभियान शुरू किया जायेगा. फिलहाल वन विभाग के कर्मियों की नजर है.

छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर जाने की संभावना : आरसीसीएफ

पलामू टाईगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एवं प्रभारी क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक कुमार आशुतोष ने बताया कि आदमखोर तेंदुआ को मारने की तय समय सीमा खत्म हो गयी है और पिछले एक पखवाड़े से तेन्दुए की कोई गतिविधि पलामू, गढ़वा एवं लातेहार जिले में नहीं देखी गयी है. उन्होंने बताया कि, संभवतः आदमखोर तेंदुआ छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर गया है, यह अबतक ट्रेपिंग कैमरे की नजरों से दूर रहा है और न ही लगाए गये स्वचालित पिंजरे के पास आया है. फिर भी वनरक्षी सावधानी बरत रहे हैं.

आदमखोर तेंदुआ को मारने के लिए हैदराबाद के विशेषज्ञ नवाब शफथ अली खान गढ़वा से पलामू टाईगर रिजर्व के मुख्य स्थल “बेतला“ में आकर उसके टोह लेने की कोशिश किए, मगर तेन्दुए की कोई हलचल नहीं दिखाई पङी. फिलहाल वह बिहार के दौरे पर हैं.

आदमखोर तेंदुआ एक बार गढ़वा जिले के भंडरिया में दूर से दिखा था, लेकिन दूरी अधिक होने की वजह से शूटर खान उसे निशाना नहीं बना सके. क्षेत्र निदेशक ने बताया कि, तेन्दुआ के संख्या के मामले में रिजर्व धनी है, यहां करीब सौ की संख्या में उक्त वन्यप्राणी हैं.

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