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बोकारो: उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र जमुआ बेड़ा व खर्चा बेड़ा में सरकारी योजनाओं का इंतजार, पुल नहीं होने से जान जोखिम में डालकर पैदल नदी पार कर रहें ग्रामीण

Bokaro: गोमियां प्रखंड अंतर्गत अति सुंदरवर्ती उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के जमुआ बेड़ा एवं खर्चा बेड़ा के बीच सिक्का डूबा नाला में 40 घरों का परिवार आज भी आदम युग में जीने को मजबूर है. लाल आबो हवा के साए में अपना जीवन जीते हैं. वहां के ग्रामीण बताते हैं कि ये इलाका चारों तरफ से नदियों और पहाड़ों से घिरे हैं. बारिश के दिनों में अपने घरों में ही घिर जाते हैं.

चुट्टे पंचायत के जमुआ बेड़ा गांव  गोमिया प्रखंड मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर है. ग्रामीण कैदियों की तरह रहने को विवश है. ग्रामीण बताते हैं ऐसा लगता है कि जैसे किसी टापू में जीवन बसर कर रहे हैं. निकट के गांव खर्चा बेड़ा भी आने-जाने के लिए ग्रामीण नदी में पुल नहीं रहने से भारी बारिश होने के कारण कई कई दिनों से कैद हो गए हैं . ग्रामीणों की जिंदगी गांव के आवागमन से पूर्ण रूप से ठप्प हो चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि जीवन तो किसी प्रकार जी लेते हैं पर गांव के तीन छोर में नदी है और एक ओर पहाड़ से घिरा है पुल नहीं होने से आवागमन नदी की तेज धार में रस्सी के सहारे गांव से पार करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने यह भी बताया कि नदी पार करने में कई बार गांव के कई लोग पूर्व में बह चुके हैं. फिर भी जरूरी सामानों को लाने के लिए गांव से निकलकर नदी के उफान मारते पानी में किसी प्रकार रस्सी के सहारे ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं.

पंचायत के मुखिया मोहम्मद रियाज ने बताया कि जमुआ बेड़ा गांव चालीस आदिवासी परिवारों का गांव जो डूबा नल से चारों तरफ से घिरा है और बीते दिनों हो रहे भारी बारिश से नदी का पानी उफान पर होने से ग्रामीण टापू पर रहने को विवश है उन्हें आने जाने के लिए नदी में जान जोखिम डालकर रस्सी के सहारे नदी पार करना पड़ रहा है.

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