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बोकारोः रेलवे इलाके से लोहा चोरी का खेल वर्षो पुराना

लोकल पुलिस और रेलवे पुलिस हर वक्त रहती है बेखबर

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Bokaro: बोकारो में लोहा चोरी का खेल सालों से जारी है. जिले के रेलवे का यार्ड करीब आठ से दस किलोमीटर की परिधि में फैला हुआ है. जहां से आये दिन लोहा चोरी का खेल बोकारो में सक्रिय लोहा तस्करों के इशारे में होता रहता है. दो दिन पहले रेलवे के मुख्यालय से पहुंची विशेष शाखा की टीम ने इसका खुलासा किया.

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पिछले चार-पांच महीनों से यह खेल बोकारो के माराफारी थाना इलाके में बेखौफ होकर चल रहा हैं. हर दिन रेलवे का लोहा और बोकारो स्टील प्लांट से निकलने वाले रेलवे बैगनों से लोहा उड़ा कर चोर सीधे तस्करों के गोदाम में पहुंचा रहे थे. इस दौरान जब विजिलेंस की टीम अचानक से पहुंची, तो सभी के होश उड़ गये.

माफिया सिंडिकेट के इशारे पर तस्करी

दो दिन तो रेलवे को लोहा पहचानने में लग गया. उसके बाद रेलवे के अधिकारियों ने माना की सभी लोहा रेलवे का है. लेकिन जानकारों की मानें तो रेलवे बैगन से चोरी कर तस्कर एक-दो दिन के अंतराल में माराफारी थाना क्षेत्र के रांची मोहल्ले के उसी तालाब में फेंक देते है, जहां से रेलवे अधिकारियों को यह लोहा मिला. यह धंधा बोकारो स्टील सिटी थाना क्षेत्र के एक माफिया सिंडिकेट के इशारे में हो रहा है, लेकिन आरपीएफ की टीम लोहा बरामदगी स्थल से किसी को पकड़ नहीं सकीं. जिस कारण वह उनके हत्थे नहीं चढ़ सका.

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बोकारो में कभी बंद नहीं हुआ लोहा चोरी का खेल

बालीडीह के अड्डा क्वारी इलाके में जिस लोहे के खेल को तत्कालीन एसपी कुलदीप द्विवेदी ने बंद कराया था, जिसके बाद से धंधा तो व्यापक पैमाने पर बंद हो गया. लेकिन छोटे-छोटे तरीके यह धंधा चलता रहा. रेलवे यार्ड इलाके से लोहा तस्करी का खेल चलता रहा. यार्ड से चोरी कर माल को वियाडा के उद्योगों में पहुंचाने का खेल कभी नहीं रुका. दो दिन पूर्व जो रेलवे का माल बरामद हुआ है, वह भी बियाडा के उद्योग में जाकर गलाने का काम किया जाता था. अभी सिटी थाना इलाके में कई स्क्रैप का धंधा चलता है. इस धंधे की आड़ में चोरी के लोहे को खपाने का व्यापक पैमाने में काम होता है. स्क्रैप के नाम पर रेलवे इलाके से चोरी को लोहे का डालकर सीधे लोहा गलाने वाले उद्योग में भेज दिया जाता है.

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रेलवे यार्ड से होती है सिलिकॉन पत्थर की भी चोरी

लोहे के साथ-साथ लोहा बनाने में उपयोग में आने वाले सिलिकॉन पत्थर की भी चोरी का खेल रेलवे यार्ड से बीते कई वर्षो से चल रहा है. जिसकी भी भनक रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों को नहीं है. बालीडीह क्षेत्र में सक्रिय धंधेबाज रेलवे यार्ड में बोकारो स्टील प्लांट में सिलिकॉन पत्थर लेकर पहुंचने वाली रैंक से इसे उतरवाने का काम करते हैं. और रात को इसे बालीडीह के एक उद्योग में जमा करते हैं. यहां से हर एक सप्ताह मे 10-12 टन पत्थर को बियाडा में ही लोहा बनाने वाली कंपनी को सप्लाई कर देते है.

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