
New Delhi : अगले वर्ष पांच राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है. इसके मद्देनजर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी की अहम बैठक शुरू हो गई है.बैठक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हो रही है. Fसमें विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों में पार्टी के प्रचार अभियान और रणनीति पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा इस बैठक में कृषि कानून विरोधी आंदोलन, लखीमपुर खीरी हिंसा और कोरोना टीकाकरण पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा.
इन राज्यों में होने हैं चुनाव
आपको बता दें कि वर्ष 2022 में गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें गोवा, यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में फरवरी-मार्च 2022 में जबकि हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव नवंबर और गुजरात के दिसंबर 2022 में होंगे.
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पांच राज्यों में भाजपा के सामने सरकार बचाने की चुनौती
जिन पांच राज्यों में अगले वर्ष की शुरुआत में चुनाव होने हैं वहां चार राज्यों में अभी भाजपा की सरकार है. सिर्फ कांग्रेस के हाथ में पंजाब है. भाजपा के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यूपी बना हुआ है. भाजपा किसी भी कीमत पर यूपी को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती है. यही वजह है कि डेढ़ महीने पहले भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर पांच सदस्यीय चुनाव प्रभारियों की घोषणा की थी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को पार्टी ने यूपी का चुनाव प्रभारी बनाया है और उनके साथ पांच केंद्रीय मंत्रियों को सह प्रभारी बनाया गया है.
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कृषि कानूनों की फांस
फरवरी – मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की पूरी कोशिश है कि तीन कृषि कानूनों के मसले और इसके खिलाफ हो रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को किसी तरह से सुलझा लिया जाए. केंद्र सरकार इसके लिए लगातार प्रयास भी कर रही है. केंद्र की तरफ से इस संबंध में कई दौर की बातचीत भी हुई है लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है.
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विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप
वहीं विपक्ष भी किसानों के मसले को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है. वहीं केंद्र का आरोप है कि विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है और किसानों को भड़काने का काम कर रहा है. केंद्र का ये भी कहना है कि देश के किसान उनके साथ हैं और जो इसके विरोध में लगभग एक वर्ष से सड़कों को जाम किए हुए बैठे हैं वो दरअसल, राजनीति करने का काम कर रहे हैं.
आज होने वाली बैठक में इस मुद्दे को सुलझाने पर तो चर्चा हो ही सकती है साथ ही इन राज्यों में चुनाव प्रचार की कमान और इसके चेहरों को लेकर भी चर्चा हो सकती है. बता दें कि उत्तराखंड में पार्टी ने पांच वर्षों के दौरान कई मुख्यमंत्री बदले हैं. इसको देखते हुए भी पार्टी अपनी रणनीति तैयार करेगी जिससे इसका खामियाजा आगामी विधानसभा चुनाव में न भुगतना पड़े.
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