
New Delhi : जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपोह इलाके में रविवार को हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ने ली है. सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहे बयान में लिबरेशन फ्रंट ने कहा है कि यह हमला हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से मुस्लिमों को लिंच किए जाने के जवाब में है. लिबरेशन फ्रंट ने कहा कि बीते एक साल में बिहार में ही 200 मुस्लिमों को लिंच करके मारा गया है. यही नहीं इस दहशतगर्द संगठन ने जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोगों को लौट जाने की धमकी दी है. यूएलएफ के प्रवक्ता उमर वानी ने कहा, ‘हम पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि बाहरी लोग हमारी धरती से चले जाएं, वरना उन्हें अंजाम भुगतना होगा. निर्दोष नागरिकों पर भारतीय फोर्सेज की ओर से किए गए हमलों के जवाब में ये अटैक किए गए हैं.’
आतंकी समूह द्वारा इस पत्र को 17 अक्टूबर को जारी किया गया. इस पर यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू एंड कश्मीर लिखा है और नीचे इस समूह के प्रवक्ता उमर वानी का नाम और स्टैम्प है. पत्र में कहा गया, “अस्सलाम वालेकुम, आज से पहले ‘स्वतंत्रता सेनानियों’ ने तीन गैर स्थानीय हिंदुत्ववादी लोगों को साउथ कश्मीर के कुलगाम के वानपोह इलाके में मारा था. हिंदुत्व कट्टरपंथियों ने बिहार में 200 मुस्लिमों को पिछले एक साल में मारा. जैसा कि पहले ही धमकी दी जा चुकी है कि वो लोग हमारी जमीन को छोड़ें वरना उन चीजों के लिए तैयार रहें. ये बदला लेने के लिए की गई स्ट्राइक्स थीं उन अत्याचारों के विरुद्ध जो भारतीय सेना मासूम नागरिकों पर करती है.”

आगे पत्र में कहा गया, “केवल एक हफ्ते में सेना ने हमारे 4 मासूम नागरिक नकली एनकाउंटर्स में शहीद कर दिए. सीआरपीएफ ने एक गरीब को भी अनंतनाग जिले के कोकरनाग में मारा था.”
आतंकी संगठन ने धमकी देते हुए पत्र में कहा है, “हम फिर हर गैर-कश्मीरी को हमारी जमीन छोड़ने को कहते हैं वरना वो परिणामों के लिए तैयार रहें. अगर सेना ने नागरिकों के विरुद्ध अत्याचार नहीं खत्म किया हमारे स्वतंत्रता सेना राजनेताओं और पुलिस के परिवार को निशाना बनाने में बिलकुल नहीं हिचकेंगे.”
#Terrorists fired indiscriminately upon #NonLocal labourers at Wanpoh area of #Kulgam. In this #terror incident, 02 non-locals were killed and 01 injured. Police & SFs cordoned off the area. Further details shall follow. @JmuKmrPolice
— Kashmir Zone Police (@KashmirPolice) October 17, 2021
इससे पहले भी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट और द रेजिस्टेंस फोर्स ने स्थानीय नागरिकों और बाहरी लोगों पर हमले की जिम्मेदारी ली थी. रविवार रात से ही सुरक्षा बल कश्मीर घाटी में बाहरी मजदूरों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाने में लगे हैं. गांदरबल, सोपोर और दक्षिण कश्मीर के अन्य इलाकों से मजदूरों को सुरक्षा बल सुरक्षित स्थानों में ले जा रहे हैं. एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि बहुत से बाहरी मजदूरों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है. तीन गैर-स्थानीय मजदूरों को कुलगाम के वानपोह इलाके में आतंकियों ने निशाना बनाया था. इनमें से दो की तत्काल मौत हो गई थी, जबकि एक को अनंतनाग के अस्पताल में एडमिट कराया गया है.
बीते 24 घंटे में कश्मीर घाटी में बाहरी लोगों पर हुआ यह तीसरा आतंकी हमला था. इससे पहले बिहार के ही एक स्ट्रीट वेंडर और यूपी के एक कारपेंटर की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. ये दोनों हमले शनिवार की शाम को किए गए थे. इस महीने अब तक 11 नागरिकों को आतंकवादी निशाना बना चुके हैं. एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने अलग-अलग इलाकों में रह रहे बाहरी लोगों की लिस्ट बनाना शुरू कर दिया है ताकि उनकी सुरक्षा का ख्याल रखा जा सके. इन हमलों के बाद पूरे कश्मीर में ही सुरक्षा बढ़ा दी गई है. खासतौर पर ऐसे इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है, जहां गैर-कश्मीरी लोगों की संख्या ज्यादा है.
इसके अलावा कश्मीरी पंडितों की रिहाइश वाले इलाकों में भी तैनाती बढ़ाई गई है. बाहरी लोगों की हत्या की जम्मू-कश्मीर के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने निंदा की है. कुलगाम से 4 बार विधायक रहे युसूफ तारिगामी ने इन हमलों को बर्बर बताते हुए कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की घटनाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता.
कब कब हुई हत्या
- 2 अक्टूबर को मोहम्मद शफी डार को मारा गया था क्योंकि उन पर सुरक्षाबल से लिंक होने के आरोप थे.
- 2 अक्टूबर को ही मजीद अहमद गोजरी की हत्या हुई थी. वह श्रीनगर के छतबाल निवासी थे. उन पर सेना की मदद करने के आरोप थे.
- 5 अक्टूबर को 68 साल के माखन लाल बिंद्रू श्रीनगर में उन्हीं की फार्मेसी की दुकान पर मारे गए थे.
- 5 अक्टूबर को ही श्रीनगर के लाल बाजार में एक सड़क किनारे खाने का सामान बेचने वाले वीरेंद्र पासवान को मारा गया था. वह भागलपुर के रहने वाले थे.
- 5 अक्टूबर को मोहम्मद शफी लोन को आतंकियों द्वारा मारा गया. वह बांदीपोरा में टैक्सी स्टैंड अध्यक्ष थे और कैब चलाते थे.
- 7 अक्टूबर को एक सरकारी स्कूल में घुसने के बाद आतंकियों ने सुपिंदर कौर और दीपक चंद नामक शिक्षकों को छाँट कर मारा.
- 16 अक्टूबर सगीर अहमद जो उत्तरप्रदेश के थे और कारपेंटर थे, उन्हें भी पुलावामा में मारा गया.
- अरबिंद कुमार शाह भी बिहार के बांका से थे और श्रीनगर में गोलगप्पा बेचते थे. ईदगाह इलाके में गोलगप्पा बेचते समय उन्हें आतंकियों ने निशाना बनाया और गोली मार उन्हें खत्म कर दिया. इस पूरी घटना के बाद नीतीश कुमार ने 2 लाख का मुआवजा शाह के परिवार के लिए देने का वादा किया है.
- 17 अक्टूबर को मारे गए राजा ऋषि देव भी बिहार के मजदूर थे. वह कुलगाम के वानपोह में रहते थे. उनके साथ जोगिंदर ऋषि देव को भी मारा गया है. ये घटना एक पूर्व एसएलए के आवास से नजदीक में हुई है. इस हमले में चुनचुन ऋषिदेव घायल हैं.




