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संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण कर रही है भाजपा : हेमंत सोरेन

15वें वित्त आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस में ‘न्यू इंडिया-2022’ जोड़ने का विरोध

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Ranchi: नेता प्रतिपक्ष हेंमत सोरेन ने भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं के उपर राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है. उनके मुताबिक भाजपा ने 15 वित्त आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस में जिस तरह से पार्टी का पॉलिटिकल स्लोगन ‘न्यू इंडिया – 2022’ को जोड़ा है, वह पूरी तरह से गलत है. वही देश में नया कर प्रणाली (जीएसटी) लागू होने के बाद आयोग में जीएसटी परिषद से जुड़े किसी सदस्य को शामिल नहीं करने की बात करते हुए सोरेन का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद केवल झारखंड को 2,500 करोड़ राशि का नुकसान हुआ है. लेकिन आयोग गठित करने से पहले सरकार ने इस और कोई ध्यान नहीं दिया.

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वित्त आयोग पर खींची गयी सीमा रेखा

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आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस की बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार ने वित्त आयोग की निष्पक्षता को बांधने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से 14वीं आयोग की अनुशंसा और न्यू इंडिया-2022 जैसी योजनाओं के कारण केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखने की बात 15वीं वित्तीय आयोग को कहा है, इससे एक तरह से सीमा रेखा खींच दिया गया है. वही भाजपा ने पार्टी का स्लोगन ‘न्यू इंडिया – 2022’ के लिए राशि निर्धारित करने का काम आयोग की कार्यशैली में जोड़ा है. ऐसा कर भाजपा अब संवैधानिक संस्था पर भी राजनीतिकरण करने का काम रही है.

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मानसरोवर यात्रा पर दिए जानेवाले अनुदान पर सवाल

हेमंत सोरेन ने कहा कि जिस तरह से सरकार ने आयोग के माध्यम से लोकलुभावन योजनाओं के खर्च में भी कटौती करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन देने का काम किया है, यह भी संदेह की घेरे में है. मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले झारखंडियों को एक लाख रुपया का अनुदान देने की योजना की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका निर्धारण कौन करेगा कि यह योजना लोकलुभावन है कि नहीं.

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राज्य को 2500 करोड़ का हुआ राजस्व नुकसान

सोरेन के मुताबिक वित्त आयोग में जीएसटी परिषद का कोई सदस्य नहीं है. जबकि राज्य को जीएसटी के कारण ही जून 2018 तक करीब 2500 करोड़ की राशि का नुकसान हुआ है. सरकार को चाहिए था कि आयोग में जीएसटी परिषद से संबंधित किसी सदस्य को शामिल किया जाता, लेकिन ऐसा नहीं करना एक तरह से राज्य के लोगों को साथ नाइंसाफी हैं.

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