
Ranchi: झारखंड सरकार के मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों को घोर अभाव है. इसके कारण विद्यालय का काम सुचारू रूप से नहीं चल पाता है. राज्य के कुल मीडिल स्कूलों में मात्र सात फीसदी में ही प्रिंसपल हैं. वहीं छह जिलों के स्कूलों में प्रिंसपल हैं ही नहीं. हज़ारीबाग, चतरा, सरायकेला, लोहरदग्गा, साहेबगंज और पाकुड़ ज़िलों में एक भी प्रधानाध्यापक नहीं हैं, जबकि रामगढ़,कोडरमा,पश्चिमी सिंहभूम,सिमडेगा,जामताड़ा ज़िलों में प्रधानाध्यापकों की संख्या मात्र एक है, इसके आलावे धनबाद, लातेहार, गिरिडीह, गुमला, खूंटी, देवघर ज़िलों में प्रधानाध्यापको की संख्या भी इकाई अंक में ही है.
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शिक्षकों की कमी दूर करे सरकार- शिक्षक संघ
अखिल झारखण्ड प्रथामिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिजेन्द्र चौबे, महासचिव राममूर्ती ठाकुर व प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि राज्य के मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों का टोटा पड़ा है. विभिन्न जिलों में प्रधानाध्यापकों के 3226 स्वीकृत पदों के विरुद्ध मात्र 226 प्रधानाध्यापक ही पदस्थापित हैं. इस प्रकार मात्र सात प्रतिशत विद्यालयों में ही प्रधानाध्यापक पदस्थापित हैं. लंबे समय से प्रोन्नतियों के लंबित रहने एवं प्रोन्नत्ति नियमावली की जटिलता के कारण आज 3000 पद रिक्त पड़े हुए हैं. जबकि कई अहर्ताधारी शिक्षक बिना प्रोन्नत्ति के ही सेवानिवृत होते जा रहे हैं.
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अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रधानाध्यापकों के इन 93 प्रतिशत रिक्तियों पर तत्काल शिक्षकों को प्रोन्नत करने के लिए प्रोन्नत्ति नियमावली में संशोधन की मांग शिक्षा सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह से की है.
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