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Birthday special: जानिये आखिर क्यों एक्ट्रेस दीप्ति नवल से फैंस मिस चमको नाम से ऑटोग्राफ लेते थे

कमला, दामुल, साथ-साथ चश्मे बद्दूर, रंग - बिरंगी, किसी से ना कहना, कथा जैसे यादगार फिल्में कीं

Naveen Sharma

दीप्ति नवल हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार हैं. वे अपने शानदार अभिनय के लिए जानी जाती हैं. उनके अभिनय का कमाल हम फिल्म निर्माता और निर्देशक जगमोहन मुंद्रा की 1985 में रीलीज हुई फिल्म कमला में देख सकते हैं. मार्क जुबेर व शबाना आज़मी स्टारर यह फिल्म आगरा- मोरेना-मैनपुरी- एटा एरिया में औरतों की खरीद बिक्री की सच्ची घटना पर आधारित थी. इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार अश्विनी सरीन ने धौलपुर में कमला नाम की महिला को यह बात साबित करने के लिए खरीदा था कि आज भी देश के कुछ इलाकों में जानवरों की तरह ही औरतों की बिक्री भी होती है.

नाटककार विजय तेंदूलकर ने इस घटना पर नाटक लिखा था. इन्होंने ही फिल्म की पटकथा लिखी थी. कमला फिल्म में दीप्ति नवल ने ही उस कमला नाम की आदिवासी युवती का किरदार निभाया था जिसे पत्रकार बने मार्क जुबेर मेले में पैसे देकर खरीदता है. दीप्ति कमला का रोल बहुत ही ओथेंटिक अंदाज में निभाती हैं. वो बोलती महज दो चार शब्द ही हैं, बस अपनी बड़ी-बड़ी बोलती आंखों से ही अपना दर्द, बेबसी और भोलापन बड़ी शिद्दत से बयान करतीं हैं.

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जीवन की यात्रा

दीप्ति का जन्म 22 अगस्त 1957 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था. इनका बचपन अमेरिका के न्यूयार्क में बीता जहां उनके पिता सिटी यूनिवर्सिटी में शिक्षक थे. दीप्ति नवल को बचपन से ही अभिनय के साथ—साथ चित्रकारी एवं फोटोग्राफी का शौक था. इनके पिता भी चाहते थे कि वे कला के क्षेत्र में ही अपना करियर बनायें.

श्याम बेनेगल की फिल्म ‘जूनुन’ से शुरू किया फिल्मी सफर

दीप्ति ने अपने फिल्म कैरियर की शुरूआत 1978 में उस समय के जाने—माने फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल की फिल्म फिल्मल ‘जूनुन’ की थी. इनको पहचान 1980 में प्रदर्शित फिल्म ‘एक बार फिर’ से मिली. इस फिल्म में सुरेश ओबेराय के साथ ये लीड रोल में थीं.

फारूख शेख के साथ जोड़ी

दीप्ति नवल और फारूख शेख के साथ जोड़ी स्क्रीन पर खूब जमती थी. इन्होंने कई फिल्मों में अच्छा काम किया है. इस जोड़ी की साथ-साथ, चश्मे बद्दूर, रंग – बिरंगी, किसी से ना कहना, कथा और लिसेन अमाया फिल्में देखने लायक हैं. खासकर साथ-साथ फिल्म में इस जोड़ी को लोगों ने खूब पसंद किया था. इसमें गीता (दीप्ति नवल) एक अमीर खानदान की लडकी है जोकि एक आदर्शवादी लडके अविनाश (फारुख शेख़) से प्रेम करती है और घर वालों के विरोध के बावजूद शादी कर लेती है.

शादी के बाद अविनाश की सोच में ऐसा परिवर्तन आ जाता है और वो पैसे के लिए सिद्धांतों से समझौता करने लगता है. गीता इसका विरोध करती है और अविनाश को छोड़ कर चली जाती है. इस फिल्म के गीत भी काफी हिट हुए थे खासकर जगजीत सिंह की गायी गजलें ये तेरा घर ये मेरा घर किसी को देखना हो अगर, तो पहले आ के मांग ले तेरी नजर मेरी नजर और तुमको देखा तो ये ख्याल आया.

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चश्मे-बद्दूर’ की मिस चमको

फारुख शेख और दीप्ति नवल की चश्मे-बद्दूर’(1981) फिल्म भी खूब चली थी. इसमें सेल्स गर्ल की भूमिका में दीप्ति जमी थीं. वे एक डिटर्जेंट चमको घर-घर जाकर बेचती थीं इसकी वजह से उस दौर में इनके प्रशंसक जब इनसे ऑटोग्राफ लेते थे तो इनसे ‘मिस चमको’ लिखने की गुज़ारिश किया करते थे.

‘इसके अलावा दीप्ति घर हो तो ऐसा’, ‘शक्ति’, ‘फिराक’, ‘हम पांच’, ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’, ‘तेवर’ जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं. वे आखिरी बार पॉपुलर वेब सीरीज ‘मेड इन हैवेन’ में नजर आई थीं.

वैवाहिक जीवन नहीं रहा सफल

वैसे तो दीप्ति ने दो बार विवाह किया था. पहली शादी इन्होंने फिल्म निर्देशक प्रकाश झा से की थी. प्रकाश से मनमुटाव के बाद इन्होंने तालाक ले लिया था. इसके बाद इन्होंने पंडित जसराज के भतीजे और फिल्मकार विनोद पंडित से विवाह किया लेकिन यह साथ भी लंबा नहीं चला. अब दीप्ति अकेली रहती हैं. वे पेंटिंग करती हैं और कविताएं भी लिखती हैं.

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