Bihar

बिहार विधानसभाः स्पीकर के लिए विपक्ष ने भी उतारा प्रत्याशी, कल पता चलेगा- किसमें कितना है दम

एनडीए की ओर से विजय सिन्हा प्रत्याशी , महागठबंधन ने अवध बिहारी चौधरी को उतारा मैदान में

Patna: बिहार विधानसभा के नये अध्यक्ष (स्पीकर) के चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला रोमांचक दौर में पहुंच गया है. एनडीए (NDA) की ओर से भाजपा विधायक विजय सिन्हा प्रत्याशी हैं, जबकि महागठबंधन ने राजद नेता अवध बिहारी चौधरी को मैदान में उतार है. दोनों नेताओं ने आज नामांकन भर दिया और कल चुनाव है.

विधानसभा का अंकगणित है एनडीए के पक्ष में

विधानसभा में स्पीकर (Bihar vidhan sabha speaker) का चुनाव के लिए उम्मीदवार उतारने के बावजूद भी महागठबंधन (Mahagathbandhan) को जीत को लेकर कड़ी टक्कर से जूझना होगा. क्योंकि जो अंकगणित है वह महागठबंधन के पक्ष में नहीं है फिर भी महागठबंधन ने एक बड़ा दांव खेला है.

राजद की ओर से स्पीकर पद के लिए उम्मीदवार उतारे जाने के साथ ही ये साफ हो गया कि इस बार विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव वोटिंग के जरिए होगा. मंगलवार को महागठबंधन में शामिल कांग्रेस और वाम दलों के साथ राजद नेतृत्व ने चर्चा की. इसमें राजद नेता अवध बिहारी चौधरी के नाम पर मुहर लगी.

आपको बता दें कि पहले एनडीए की ओर सातवीं बार विधायक बने नंद किशोर यादव को विधानसभा अध्यक्ष प्रत्याशी बनाने की अटकलें थीं. उन्हें बिहार मंत्रिमंडल में भी जगह नहीं मिली है. सीटों के लिहाज से राजद विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है. इस वक्त विधानसभा में राजद के 75, भाजपा के 74 और जदयू की 43 सीटें हैं.

लखीसराय से चौथी बार लगातार विधायक चुने गये हैं विजय सिन्हा

विजय सिन्हा पिछली सरकार में श्रम संसाधन मंत्री थे. वह लखीसराय से चौथी बार लगातार विधायक चुने गए हैं. भाजपा के खाटी कार्यकर्ता होने के साथ ही पूर्व डिप्टीग सीएम सुशील कुमार मोदी के करीबी भी बताए जाते हैं. मंत्री बनने से पहले प्रदेश प्रवक्ता के अलावा जिले से लेकर प्रदेश संगठन में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं. इस बार बिहार मंत्रिमंडल में जगह नहीं बनी थी. कहा ये भी जा रहा है विजय सिन्हा को मैदान में उतार कर भाजपा ने सवर्ण कार्ड खेला है.

कौन हैं अवध बिहारी चौधरी

पिछड़ी जाति से आने वाले अवध बिहारी चौधरी की गिनती राजद के दिग्गज नेताओं में होती है. इस बार वह छठी बार सीवान सदर सीट से विधायक बने हैं. इससे पहले अवध बिहारी चौधरी 1985, 1990, 1995, 2000 और फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में जीत चुके हैं. वह राबड़ी देवी सरकार में शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं.चौधरी ने उम्मीदवार बनाये जाने पर कहा कि वह निष्पक्ष तरीके से सदन को चलाएंगे. किसी को शिकायत का मौका नहीं देंगे.

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