BiharBihar Election 2020

बिहार चुनावः सत्ता में आने पर पहली कैबिनेट मीटिंग में 10 लाख नौकरी पर लगेगी मुहर, महागठबंधन के मेनिफेस्टो में वादों की झड़ी

Patna:बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है. बेरोजगारी दूर करने पर इस घोषणापत्र में विशेष जोर दिया गया है. शनिवार को महागठबंधन ने मेनिफेस्टो जारी किया, इस दौरान राजद नेता तेजस्वी यादव समेत घटक दलों के अन्य नेता भी मौजूद रहे. इस दौरान महागठबंधन के नेताओं ने बीजेपी और नीतीश कुमार पर जमकर निशाना भी साधा.

 

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बेरोजगारी दूर करने पर जोर

महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र में सूबे की बेरोजगारी मिटाने पर विशेष जोर दिया गया है. मेनिफेस्टो जारी करने के दौरान तेजस्वी यादव ने फिर से 10 लाख नौकरियां देनी की बात दोहरायी. उन्होंने कहा कि सब पूछते है कि 10 लाख नौकरियां कहां से आय़ेंगी. चार लाख जॉब को बिहार सरकार में ही खाली पड़े हैं.शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग ये नौकरियां खाली हैं.

वहीं इस दौरान कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, ये चुनाव नई दशा बनाम दुर्दशा का चुनाव है, ये चुनाव नया रास्ता और नया आसमान बनाम हिन्दू-मुसलमान का चुनाव है, ये चुनाव नए तेज़ बनाम फ़ेल तजुर्बे की दुहाई का चुनाव है, ये चुनाव खुद्दारी और तरक्की बनाम बंटवारा और नफरत का चुनाव है.

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क्या है महागठबंधन के संकल्प पत्र में खास

महागठबंधन ने वादा किया कि अगर वो सत्ता में आती है तो प्रदेश में 10 लाख स्थायी नौकरियां दे जायेंगी, और ये फैसला सरकार गठन के बाद होनेवाली पहली कैबिनेट मीटिंग में लिया जायेगा.

सरकारी नौकरी में बहाली के लिए छात्र-छात्राओं कको कोई आवेदन शुल्क नहीं देना होगा.

किसी आपदा के दौरान प्रवासी और उनके परिवार की मदद के लिए कर्पूरी श्रमवीर सहायता केंद्र बनाये जायेंगे.

मनरेगा में प्रति परिवार की जगह प्रति व्यक्ति को काम का प्रावधान, न्यूनतम वेतन की गारंटी औऱ कार्य दिवस को 100 दिन से 200 दिन किया जायेगा. साथ ही मनरेगा की तर्ज पर शहरी रोजगार योजना भी बनाया जायेगा.

नियोजित शिक्षकों को स्थायी कर समान काम के लिए समान वेतन की नीति पर अमल किया जायेगा. विभागों की निजीकरण को खत्म किया जायेगा.

राज्य में वर्ष 2005 से लागू नई अंशदायी पेंशन योजना को बंद कर पूर्व की भांति पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी.

कार्यपालक सहायक, सांख्यिकी स्वयंसेवक, लाइब्रेरियन, आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं, आशाकर्मियों, एमडीएम रसोई वर्करों, ग्रामीण, चिकित्सकों, जीविका दीदीयों के अधिकारों में विस्तार की बात कही गयी है.

जीविका स्वंय सहायता समूह के कैडर को स्थायी किया जायेगा. जीविका कैडर के मौजूदा दर के मानदेय को दोगुना किया जायेगा.

बिहार में बंद पड़ी मिल और दूसरे उद्योगों को दोबारा शुरू किया जायेगा. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, इंडस्टी स्पेसफिक कलस्टर्स, फूड पार्क, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, आईटी पार्क, निर्माण क्षेत्र के स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) हर बाजार के समीप तैयार कराए जाएंगे.

बिहार विस से ऐसा कानून पारित करना है जो केंद्र सरकार के तीन किसान विरोधी कानूनों को बिहार में नाकाम कर सके. इस कानून के तहत राज्य की मंडियों में किसानों की फसलों की लागत मूल्य का डेढ़ गुणा दाम पर सरकारी खरीद की गारंटी दी जायेगी.

किसानों के कर्ज माफी का भी वादा चुनावी घोषणा पत्र में किया गया है. सस्ते दर पर लोन, बिजली, पानी, खाद-बीज किसानों को उपलब्ध करना शामिल है.

प्रमंडल स्तर पर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पीटल का निर्माण किया जायेगा. जिले के सदर अस्पताल में डायलिसिस सेंटर खोले जायेंगे.

बिहार में शिक्षा पर बजट का 12 प्रतिशत खर्च किया जायेगा. समेत कई लुभाने वादे किये गये हैं.

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