
Akshay Kumar Jha
Ranchi: कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन में बैंकों को जरूरी सेवा में रखा गया. ताकि आर्थिक गतिविधि पर ब्रेक न लगे. लॉकडाउन में कई लोग बेरोजगार हुए. कईयों का कारोबार खत्म हो गया. सरकार की तरफ से बैंकों को कहा जाता रहा कि वो लोगों को कर्ज देते रहें.
केंद्र सरकार की तरफ से 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान भी किया गया है. हालांकि उन पैसों का हिसाब देने में बैंक फिलहाल असमर्थ हैं. लेकिन न्यूज विंग आपको इस खबर के जरिए बताने जा रहा है कि लॉकडाउन में बैंकों की तरफ से कितने लोगों के बीच कितना लोन बांटा गया. जिन्हें लोन दिया गया वो किस कैटेगरी में आते हैं.
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44,279 को पड़ी लोन की जरूरत 22,490 को मिला
इस खबर में जो भी आंकड़े दिये जा रहे हैं वो लॉकडाउन शुरू होने से लेकर 30 मई तक के हैं. लॉकडाउन लगने के बाद प्राइवेट औऱ सरकारी बैंकों में 44,279 लोगों ने लोन के लिए आवेदन दिया. हालांकि बैंकों की तरफ से 39,067 लोगों के आवेदन स्वीकृत किये गये. जबकि 30 मई तक 22,490 लोगों के अकाउंट में पैसा चला गया. बाकी बचे लोगों के अकाउंट में लगातार बैंक की तरफ से पैसा भेजा जा रहा है. कहा जा रहा है कि आनेवाले दस दिनों में सभी के खाते में रकम चली जायेगी. झारखंड के सभी बैंकों ने मिल कर 39,067 को 490.84 करोड़ की राशि लोन के तौर पर देने की स्वीकृति दी है. जिसमें 22,490 के खाते में 292.65 करोड़ की राशि डाल दी गयी है.
रीटेल सेक्टर
रीटेल सेक्टर में पर्सनल लोन से लेकर कई तरह के लोन बांटे गये हैं. रीटेल सेक्टर में लोन के लिए 5310 आवेदन आये. इनमें बैंकों ने 4988 स्वीकृत किये. स्वीकृत 73.62 करोड़ रकम में से 54.76 करोड़ रुपये 4284 लोगों के खाते में भेजे जा चुके हैं.
एमएसएमई सेक्टर
एमएसएमई (Micro Small & Medium Enterprises) सेक्टर में 19,896 आवोदनों में से 17,520 आवेदनों को बैंकों ने स्वीकृत किया. स्वीकृत 363.20 करोड़ की राशि में 8,901 के खातों में 205.52 करोड़ की राशि भेजी जा चुकी है.
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कृषि सेक्टर
कृषि से जुड़े 9,063 लोगों ने लोन के लिए आवेदन दिया. बैंकों ने 8,407 स्वीकृत किये. स्वीकृत 37.97 करोड़ की राशि में से 4,667 लोगों के खाते में 22.93 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं.
एसएचजी (सेल्फ हेल्प ग्रुप)
एसएचजी की तरफ से लोन के लिए 10,010 आवेदनों में से बैंकों ने 8,152 स्वीकृत किये. स्वीकृत 16.05 करोड़ की राशि में से 4,638 एचएसजी ग्रुप खातों में 9.44 करोड़ की राशि भेजी जा चुकी है.
प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी पांच फीसदी भी नहीं
प्राइवेट बैंकों की नजर हमेशा से सरकारी पैसों पर रहती है. सरकारी योजनाओं के पैसे अपने बैंक में जमा करने के लिए प्राइवेट बैंकवालों की लॉबिंग किसी से छिपी नहीं है. लेकिन जब आपदा के वक्त प्राइवेट बैंकों द्वारा लोन देने के बात आयी तो वो पीछे रह गये. आंकड़ों की बात करें तो प्राइवेट बैंकों की तरफ से पूरे लॉकडाउन में किसी भी तरह का लोन देने में कंजूसी की गयी है. अभी तक करीब 293 करोड़ रुपये लोगों के खाते में गये हैं. उसमें से पांच फीसदी से भी कम प्राइवेट बैंकों की हिस्सेदारी है.
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