Opinion

राजीव बजाज की बातें और मीडिया में उपेक्षा

Faisal  Anurag

राजीव बजाज का यह साहस ही है कि न केवल उन्होंने राहुल गांधी से बात किया, बल्कि लॉकडाउन,सरकार की औद्योगिक पहल और महामारी से निपटने के तरीकों पर सरकार को आड़े हाथों लिया. राजीव बजाज की इस बातचीत को मीडिया में ज्यादा महत्व नहीं दिया गया. ठीक इसी तरह एक अन्य खबर के साथ भी मीडिया ने इसी तरह नजरअंदाज करने का व्यवहार किया. वह खबर उस रिपोर्ट को लेकर है, जिसे इंडियन जनरल पब्लिक हेल्थ ने प्रकाशित किया है और जिसमें  कोरोना वायरस से निपटने में विशेषज्ञों की उपेक्षा करने की बात कही गयी है. सरकार को ब्यूराक्रेट्स पर निर्भर बताकर इस रिपोर्ट ने उस बहस को तेज कर दिया है, जो नोटबंदी की विफलता के बाद लॉकडाउन की नाकामयाबी व लापरवाही को लेकर जारी है.

राजीव बजाज महात्मा गांधी के सहयोगी जमनालाल बजाज के खानदान के हैं. पिता की तरह ही राहुल बजाज को भी एक ऐसा उद्यमी माना जाता रहा है, जो अपनी बात खुलकर करता है. राहुल बजाज ने अमित शाह को एक परिचर्चा के दौरान कहा था कि सरकार की नीतियों के कारण इंडस्ट्री में भय का माहौल है.

भय के इस माहौल को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि राजीव बजाज को उनके मित्र कह रहे हैं कि इस बातचीत के कारण उनपर मुसीबतों का पहाड़ आ सकता है. बातचीत के एक दिन पहले राहुल गांधी से उनके एक मित्र ने जानना चाहा कि अगली वार्ता वे किससे कर रहे हैं. राजीव बजाज ने अपने एक मित्र को जब बताया कि गुरूवार को 12 बजे वे राहुल गांधी से बात करेंगे तो उस मित्र ने कहा ऐसा मत करना नहीं तो मुसीबत में फंस सकते हो.

यह माहौल पिछले छह सालों में बना है. 2012 से 14 के बीच जब मनमोहन सिंह की सरकार थी, उनकी आलोचना सभी सेक्टरों के लोग खुले आम करते थे. इसमें इंडस्ट्री के लोग भी शामिल थे. लेकिन 2014 के बाद एकतरफा संवाद का जो दौर शुरू हुआ है, उसमें कोई भी साहस के साथ बोलने की हिम्मत नहीं करता. पिछले साल राहुल बजाज इकलौते थे, जिन्होंने इस व्याप्त भय की खुलेआम चर्चा की थी.

राहुल गांधी ने डा. रघुराम राजन से संवाद की जो प्रक्रिया शुरू कर बहस को गंभीर बनाने का प्रयास किया था, उसमें डॉ अभिजित बनर्जी और बाद में हेल्थ प्रबंधन के दो बड़े विदेशी मेहमान शामिल हो चुके हैं. इन तमाम संवादों की आलोचना भाजपा के मंत्रियों और प्रवक्ताओं ने खुलकर किया. यहां तक कि खुद एंकर भी एक पक्ष बनकर राहुल गांधी पर हमलावर हो गये.

लेकिन राजीव बजाज ने जिस तरह लॉकडाउन और इकोनॉमी के सवाल पर सरकार को घेरा है, उससे जाहिर होता है कि कम लोग भले ही बोल रहे हों, लेकिन सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है. राजीव बजाज ने कहा कि लॉकडाउन से कोरोना तो हारा नहीं है, लगातार केस बढ़ रहे हैं और इकोनॉमी भी बेहाल हो गयी है.  20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज को  लेकर भी राजीव बजाज ने सवाल उठाया है. भारतीय इंडस्ट्री के वे पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने इस पैकेज को आलोचनात्मक नजरिए से देखते हुए कहा है, दुनियाभर की सरकारों ने तो प्रोत्साहन बढ़ाने के लिए धन खर्च किया है और लोगों तक पहुंचाया है.

लेकिन भारत सरकार ने ऐसा ऊंट के मुंह में जीरा के समान किया है. उनकी बात से जाहिर होता है कि इस पैकेज से इकॉनामी को गति मिलने पर उन्हें संदेह है. यह संदेह तो अनेक आर्थिक जानकारों को भी है.

दरअसल भारत में विशेषज्ञों की उपेक्षा का यह कोई पहला आरोप नहीं है. भारतीय इकोनॉमी के बारे में कहा जा रहा है कि उसे या तो ब्यूरोक्रेट्स के हवाले कर दिया गया है या फिर ऐसे विशेषज्ञों की आर्थिक जगत में पहचान तक नहीं है. नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकारों का साथ छोड़ आलोचक बनने के बाद यह तथ्य तो सामने आ ही चुका है कि भारत के आंकड़ों को लेकर अनेक तरह के संदेह हैं.

जैसा कि पत्रकार सिद्धार्थ बरदराजन का कहना है लोकतंत्र के प्रति मोदी सरकार का निरादर भाव काफी गहरा और व्यापक है और यह हर उस संस्था तक फैल चुका है, जिसका काम कार्यपालिका की शक्ति पर अंकुश लगाकर उसे नियंत्रण में रखना है. नियंत्रित ब्येरोक्रेटों के माध्यम से इकोनॉमी और कोविड-19 से निपटने की रणनीति के नतीजे तो दिखने ही लगे हैं.

कोरोना वायरस से निपटने के नये सरकार ने जिस कोर टीम का निर्माण किया है. उसमें पब्लिक हेल्थ और महामारी विशेषज्ञों को जगह ही नहीं दी गयी है. यही कारण है कि सप्ताह में दो-तीन बार सरकार नयी गाइडलाइन जारी कर भ्रम को बढ़ा देती है. यह आरोप उस रिपोर्ट का हिस्सा है, जिसे इंडियन जर्नल पब्लिक हेल्थ ने प्रकाशित किया है.

इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. देश के 130 करोड़ लोगों के जीवन का यह सवाल है. श्रमिकों के साथ हुए व्यवहार से श्रमिक पहले से ही आहत हैं, ऐसे में लॉकडाउन भी नोटबंदी की तरह एक ऐसी हकीकत बनकर उभर रही है, जिसमें लोगों की परे​शानियां तो बेशुमार बढ़ी हैं. लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं के बराबर नजर आ रहा है.

 

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