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निशाने को भेद सकेंगे ‘अर्जुन’ या समीकरण के बनते चक्रव्यूह में फंस जाएंगे पूर्व सीएम मुंडा

Ranchi: बीते आठ बार से खूंटी से सांसद रहे कड़िया मुंडा ने सांसद रहते और टिकट कटने के बाद भी मिसाल पेश की है. इस बार इस सीट पर जीत को दोहराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा मैदान में हैं.

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बेशक अर्जुन मुंडा और बीजेपी के लिए यह सीट काफी अहम है. झारखंड बीजेपी की बात करें, तो निश्चित तौर पर एक धड़ा मुंडा के बीजेपी का है और दूसरा रघुवर दास का.

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अर्जुन की जीत या हार उनकी बाकी राजनीतिक जीवन पर भी गहरा छाप छोड़ने वाली है. ऐसे में अर्जुन मुंडा हर हाल में सीट को जीतने में लगे हुए हैं.

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जिस तरह से खूंटी में विपक्ष और दूसरे मुद्दे अर्जुन के लिए चक्रव्यूह बना रहे हैं, उससे तो फिलहाल यही कहा जा सकता है कि अर्जुन के अचूक निशाने पर नहीं है खूंटी.

क्या मिल रहा है खूंटी में अर्जुन को बीजेपी का पूरा साथ?

खूंटी लोकसभा में छह विधानसभा आते हैं. खरसांवा, तमाड़, तोरपा, खूंटी, सिमडेगा और कोलेबिरा. खूंटी और सिमडेगा की बात छोड़ दी जाए तो सभी विधानसभा पर विपक्ष का कब्जा है.

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सबसे अहम ये कि खूंटी से झारखंड सरकार में मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा बीजेपी से विधायक हैं. साथ ही वो कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे कालीचरण मुंडा के अपने सगे भाई हैं.

अर्जुन मुंडा को टिकट मिलने के बाद एक या दो बार ही बड़े आयोजन के वक्त नीलकंठ सिंह मुंडा, अर्जुन मुंडा के साथ खड़े नजर आए.

बाकी क्षेत्र में नीलकंठ सिंह मुंडा अपने पार्टी के उम्मीदवार के लिए काफी कम सक्रिय नजर आ रहे हैं. भीतरघात होने की भी खबर छनते हुए आ रही है.

खूंटी में यह है जीत और हार का समीकरण

खूंटी लोकसभा क्षेत्र एसटी बाहुल्य क्षेत्रों में आता है. 2017 की वोटर लिस्ट के मुताबिक, पूरे लोकसभा क्षेत्र में 11,65,798 वोटर हैं. इनमें से 7,69,427 वोटर एसटी हैं और ईसाई वोटरों की संख्या 3,38,081 है.

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खूंटी लोकसभा में यह तय माना जा रहा है कि ईसाई समाज का वोट बीजेपी को कतई नहीं पड़ने जा रहा है. बाकी एसटी के 4,31,346 आदिवासी समाज के वोट पर बीजेपी, कांग्रेस, झपा, सेंगल पार्टी की नजर है. यह वोट बैंक हर हाल में बंटने वाला है. किसी एक को इनके वोट नहीं मिलने वाले.

86 गांवों के लोग हो रहे हैं गोलबंद

बीजेपी के लिए एक और सिरदर्दी सामने आ रही है. खूंटी आस-पास के करीब 86 गांव के लोग गोलबंद हो रहे हैं. दरअसल पत्थलगढ़ी के वक्त सरकार की कार्रवाई करने के रवैये से ग्रामीण गुस्से में हैं.

उन्होंने तय किया है कि इन सारे गांव के लोग किसी एक पार्टी को ही वोट देंगे. इनका मानना है कि वो ऐसी पार्टी के साथ जाना चाहेंगे जो इस मुद्दे के दौरान इनके साथ खड़ा था.

जाहिर सी बात है कि बीजेपी के शासनकाल के दौरान ही पत्थलगढ़ी को लेकर खूंटी में काफी ज्यादा बवाल हुआ. सरकार से गुस्से की वजह से बीजेपी को यह खेमा वोट करे, संभव नहीं माना जा रहा है.

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