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सूचना आयुक्तों की नियुक्तिः बिना नेता प्रतिपक्ष कैसे बन गयी समिति, सदन में भी बढ़ी उलझन

♦400 से अधिक कैंडिडेट हैं सूचना आय़ुक्तों की रेस में

Ranchi : राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति मामले में लीपापोती का दौर जारी है. विधानसभा के चालू बजट सत्र में सरकार ने सदन में जो जवाब दिया है, उससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है. भाजपा के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने सूचना आय़ुक्तों की नियुक्ति मामले में सरकार से जवाब मांगा था. इस पर बताया गया कि एक मुख्य सूचना आय़ुक्त और 5 सूचना आय़ुक्तों की नियुक्ति के लिए समिति गठित है. इसकी बैठक करके आगे की कार्रवाई की जानी है. वास्तव में नेता प्रतिपक्ष को समिति में शामिल किये बगैर आयुक्तों के लिए गठित चयन समिति का कोरम पूरा नहीं होता. नेता प्रतिपक्ष का मामला अब भी विधानसभा स्पीकर के पास लंबित पड़ा हुआ है.

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5 आयुक्तों के लिए 354 आवेदन

विधानसभा में सरकार (कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग) की ओऱ से दिये गये जवाब के अनुसार मुख्य सूचना आय़ुक्त के लिए 63 कैंडिडेट्स का आवेदन शॉर्टलिस्ट किया जा चुका है. 5 सूचना आय़ुक्तों के लिए 354 आवेदन प्राप्त हुए थे. यानी कुल 6 सूचना आयुक्तों के पदों के विरुद्ध 417 कैंडिडेट रेस में लगे हुए हैं. कार्मिक विभाग के अनुसार आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति अनुशंसा करेगी.

4 बार जारी हो चुका है आवेदन

कार्मिक विभाग की ओर से सदन को बताया गया है कि राज्य सूचना आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति के लिए 4 बार विज्ञापन जारी हुए थे. वर्ष 2017 (11-03-2017) में जारी निज्ञापन के अनुसार आयुक्त के एकल पद के लिए विज्ञापन जारी हुआ था. इसके बाद 2019 (27-02-2019, विज्ञापन सं-01/2019) में इसे जारी किया गया. इसके बाद 21-10-2019 को फिर से यह जारी हुआ. 14-11-2019 को एक विज्ञप्ति जारी कर पुराने सभी विज्ञापनों को रद्द कर दिया गया था. अंततः वर्ष 2020 में (03-01-2020) फिर से नये सिरे से एक मुख्य सूचना आयुक्त और 5 सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन जारी किया गया था.

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क्या है स्थिति

राज्य सरकार के अनुसार आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. शैलेश पोद्दार बनाम राज्य सरकार (WP (C), No 1461/2020) के बीच इस पर सुनवाई जारी है. इधर आऱटीआइ कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गंभीरता नहीं दिखा रही. आरटीआइ एक्टिविस्ट आनंद किशोर पंडा के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष का मामला जान बूझ कर अटकाया जा रहा है. चयन समिति में केवल सीएम और कैबिनेट मंत्री के तौर पर मंत्री चंपई सोरेन को शामिल किया गया है. एक अन्य सदस्य के तौर पर विपक्ष के नेता को शामिल करना है. पर इसके बगैर समिति ही अधूरी है तो इसकी बैठक का भी कोई मतलब नहीं. गौरतलब है कि भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी पूर्व में सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर आयोग को सशक्त किये जाने की वकालत की है. नियुक्ति प्रक्रिया को फाइनल करने को कहा है. कहा है कि आयोग का गठन होने से करप्शन और गड़बड़ियों के मामलों पर अंकुश भी लग सकेगा.

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