
Naveen Sharma
Ranchi : हिंदी सिनेमा में कई ऐसे अभिनेता हैं जो चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए. पहली ही फिल्म में हीरो की भूमिका निभाने का मौका मिल गया. खासकर जिनके मां-पिता या अन्य कोई रिश्तेदार या परिचित फिल्मों में जुड़ा हो. उनकी लिये बॉलीवुड का फिल्मी सफर थोड़ा आसान हो जाता है. वहीं दूसरी तरफ ऐसे कलाकार भी हैं जिनको फिल्मों में एक सीन में भी दिखने के लिए वर्षों तक चप्पल घिसनी पड़ती है. नवाजुउद्दीन सिद्दिकी भी इसी संघर्षशील वर्ग से आते हैं.
छोटे किसान के परिवार से आए नवाजुद्दीन का जन्म उप्र के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव भुवाना में हुआ था. फिल्में देखने के लिए भी उन्हें कई महीनों तक पैसे जमा कर कस्बे तक जाना होता था.मुजफ्फरनगर में पढ़ाई के साथ थियेटर से भी जुड़ाव शुरू हुआ.
इसे भी पढ़ें :
एनएसडी से आया टर्निंग प्वाइंट
हमारी हिंदी फिल्मों में जितने भी शानदार अभिनेता अब तक हुए हैं उनमें नेशनल स्कूल आफ ड्रामा से प्रशिक्षण पानेवाले कलाकारों की संख्या काफी अधिक है. नवाज के जीवन में भी एक नया मोड़ तब आया जब वे एनएसडी,दिल्ली पहुंचे. यहां के प्रशिक्षण ने उनके जीवन की इमारत खड़ी करने की बुनियाद रख दी.
इसे भी पढ़ें :अरब सागर में 37 लोगों की डूबकर मृत्यु मामले में ONGC पर दर्ज हो सकता है मुकदमा
हीरो बनने मुंबई पहुंच गए
एनएसडी में मिले प्रशिक्षण की बदौलत अभिनय के गुणों से लैस होकर नवाज मुंबई पहुंचे. एक ऐसी दुनिया में जहां उनकी कोई पहचान नहीं थी. यहां से नवाज के संघर्ष की नई दास्तान शुरू हुई. शुरू में उन्होंने टीवी सीरियल में काम की तलाश की, लेकिन उनका छोटा कद, सांवला रंग, साधारण चेहरा देखकर सब हंसी उड़ाते. करीब पांच वर्षों तक काम की ही तलाश करते रहे.
इसे भी पढ़ें :कार्रवाईः राज्य में 3562 लोग बगैर मास्क के धराये, 24 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, 155 लोग हुए गिरफ्तार
एक सीन रोल से शुरुआत
नवाज का बॉलीवुड फिल्मों में सफर एक सीन की फिल्म सरफरोश (1999) और मुन्ना भाई एमबीबीएस से शुरू हुआ. इन फिल्मों में वे महज एक सीन में ही नजर आए. इसके बाद से नवाज को फिल्मों में ढंग का रोल पाने के लिेए काफी पापड़ बेलने पड़े.
इसे भी पढ़ें :वैक्सीनेशन की दिक्कतों को दूर करने के लिये झारखंड सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
अनुराग ने नवाज को निखारा

अनुराग कश्यप ने नवाज की निराशा में डूबती नैया को पार लगाने में तारणहार की भूमिका निभाई. अनुराग की द ब्लैक फ्राइडे (07) में नवाज को पहली बार ऐसा रोल मिला जिसने उन्हें पहचान दी. अनुराग की देवी डी में भी नवाज ने दर्शकों का ध्यान खिंचा. इसके बाद गैंस ऑफ वासेपुर 2 (12) में नवाज एक गैंगस्टर का स्वभाविक अभिनय किया. अपनी संवाद अदायगी और शानदार अभिनय के जरिये नवाज ने खुद को बॉलीवुड में स्थापित कर लिया. अब वे भी स्टार बन गए. अनुराग ने एक तरह से नवाज के गॉड फादर का रोल अदा किया.
इसे भी पढ़ें :दुबई में मंगेतर संग फंसी थी एक्ट्रेस, 2 दिन में प्रोग्राम बना की शादी, अब सारा खर्चा कोरोना फंड में करेंगी दान
2009 में शुरू हुआ नया सफर
जिस तरह से घोर अंधेरी रात के ठीक बाद सूरज धीरे-धीरे अपनी किरणें बिखर कर सारे जग को रोशन कर देता है ठीक उसी तरह नवाज ने भी 2009 से अपनी एक से बढ़कर फिल्मों के जरिये दर्शकों को अपनी अभिनय प्रतिभा का कायल बना लिया. देव डी, न्यूयार्क और फिराक में नवाज ने शानदार अभिनय किया. पीपली लाइव में पत्रकार की भूमिका के साथ भी उन्होंने न्याय किया था.
इसे भी पढ़ें :क्या आप कब्रों के बीच बैठ कर करना चाहेंगे कैंडल लाइट डिनर, तो आइये इस शहर में
नवाज की नई कहानी

वर्ष 2012 में सुजोय घोष की फिल्म कहानी में नवाज ने आइबी के कड़क आफिसर का किरदार निभाया. इस फिल्म की सफलता का ज्यादातर क्रेडिट विद्या बालन को मिला लेकिन नवाज ने भी अपने अभिनय की कहानी को नया विस्तार दिया. लंच बाक्स में वो इरफान को बेहतरीन टक्कर देते नजर आए. वहीं तलाश में भी उन्होंने एक शातिर अपराधी तैमूर का स्वभाविक अभिनय किया. नवाज को उनके जानदार अभिनय के लिए 60 वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ज्यूरी के स्पेशल पुरस्कार से नवाजा गया.
मांझी से नवाज बने माउंटेनमैन
बिहार के गया के रहनेवाले दशरथ मांझी के जीवन पर केतन मेहता की फिल्म मांझी द माउंटेनमैन पहली ऐसी फिल्म थी जिसमें पहली बार वो सोलो हीरो के रूप में नजर आए. दशरथ मांझी ने करीब दो दशक तक एक पहाड़ का तोड़कर सड़क बनाई थी. यह कहानी फिल्मी पर्दे के लिए बोरिंग कही जा सकती है लेकिन ऐसे विषय पर यह शानदार फिल्म बनाई गई. इसमें नवाज ने अपने अभिनय के शानदार रंग दिखाए.
वहीं फिल्म बदलापुर में हालांकि नायक तो वरुण धवन थे लेकिन विलेन का रोल करके भी नवाज ने अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवा लिया. बजरंगी भाई जान में भी सलमान खान के बाद सबसे अधिक ध्यान नवाज ने पाकिस्तानी पत्रकार की भूमिका में खिंचा.
नवाज की फिल्म रमन राधव 2.0 कान फिल्म महोत्सव में दिखाई गई. इसमें नवाज का अभिनय इतना दमदार रहा कि इसे स्टैंडिंग अवेशन मिला. इस फिल्म के डायरेक्टर भी अनुराग कश्यप हैं. यह फिल्म एक सीरीयल किलर रमन राघव पर आधारित है. इसी तरह की एक और फिल्म बाबूमोशाय बंदूकबाज में नवाज ने कांट्रैक्ट किलर का रोल किया है. रईस में भी वे ईमानदार पुलिस अधिकारी की भूमिका में जमते हैं.
श्रीदेवी की मॉम में एक प्राइवेट जासूस का रोल किया है. उनका गेटअप इतना बढ़िया था कि देखकर लगा ही नहीं की ये नवाजुद्दीन हैं.
नवाज की फोटोग्राफ फिल्म भी देखी थी. इसमें नवाज ने मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर फोटोग्राफी करने वाले फोटोग्राफर का रोल बहुत ही सहज ढंग से निभा कर उसे विश्वसनीय बना दिया था.
इसे भी पढ़ें :400 या 500 रुपये नहीं, 1.50 लाख रुपये प्रति किलो बिकता है ये स्पेशल मशरूम




