
Jamshedpur : शहर भर के विभिन्न मंदिरों व घरों में अनंत चतुर्दशी की पूजा श्रद्धा भाव से की गयी. हर साल भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी का आयोजन किया जाता है. साकची, सिदगोड़ा, बारीडीह, गोलमुरी, मानगो, बागबेड़ा, जुगसलाई समेत कई क्षेत्रों में अनंत पूजा का आयोजन किया गया. विशेष रूप से शहर के प्रसिद्ध साकची स्थित श्री शीतला मंदिर में पंडित राजू बाजपेयी के सानिध्य में दर्जनों भक्तों ने अनंत की पूजा के साथ कथा का रसपान किया. पूजा के दौरान पहले एक पात्र पर भगवान विष्णु की शेषनाग की शैय्या पर लेटी तस्वीर को स्थापित किया गया. उसके बाद तश्वीर के समक्ष चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र अर्पित कर रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप अर्पित किया गया. इसके बाद खीरा, केला, सेब समेत विभिन्न प्रकार के पकवान चढ़ाया गया.
इसे भी पढ़ें – सीएम हेमंत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर से तेजस्वी ने की मुलाकात, यूपीए की बेहतरी के लिये की बात
इस दौरान पंडित राजू वाजपेयी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनंत भगवान की पूजा अर्चना की. साथ ही भक्तों को अनंत कथा का रसपान कराया. कथा के दौरान उन्होंने अनंत व्रत के महत्व के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अनंत सूत्र के प्रत्येक गांठ भगवान विष्णु के नाम पर है. अनंत, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, बैकुंड, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविंद अनंत सूत्र की चौदह गांठें होती हैं. यह चौदह गाठें भगवान विष्णु के बनाये चौदह लोकों को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि अनंत पूजा करने से धन, वैभव, सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है. अनंत पूजा महिला और पुरुष दोनों ही कर सकते है. पुरुषों को अनंत सूत्र दायें हाथ पर तथा महिलाओं को बायें हाथ पर बांधना चाहिए. पूजा के पश्चात मध्य दोपहर 12 बजे आरती की गई. इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने अपने हाथ के बाहों पर अनंत सूत्र धारण किया. इसके बाद घर पर सेवई और पूड़ी का प्रसाद ग्रहण किया. इस पूजा में कथा से पहले नमक ग्रहण करना मना होता है. तब तक भक्तों को उपवास रहना पड़ता है.
मान्यताएं
अनंत चतुर्दशी को लेकर एक पौराणिक कथा बहुत प्रचलित है. महाभारत के दौरान पांडव जुए में अपने समस्त राजपाट हार गये थे. साथ ही उन्हें 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास काटना पड़ा था. इस कष्ट से मुक्ति के लिए युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से निवारण पूछा था. इस पर भगवान कृष्ण ने पांडवों को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी. साथ ही उन्हें 14 गांठ वाला अनंत सूत्र अपनी बांह पर बांधने का सुझाव दिया. पांडवों ने भगवान कृष्ण के कहे अनुसार व्रत का विधिपूर्वक पालन किया. इसके बाद पुनः पांडवों को धन और सुख शांति की प्राप्ति हो गयी.
इसे भी पढ़ें – बाघमारा में विधायक ढुलू समर्थकों व विरोधी मजदूरों के बीच टकराव




