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संथाल में कद्दावर नेताओं के साथ आजसू की एंट्री

Nitesh Ojha

Ranchi :  विधानसभा चुनाव के ठीक पहले माना यही जा रहा था कि चुनावी राजनीति का गढ़ संथाल परगना होगा. इसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच संघर्ष दिलचस्प होने की बात कही जा रही थी.

लेकिन अब जिस तरह जेएमएम और कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के साथ ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने संथाल में मजबूती से एंट्री की है. उससे माना जा रहा है कि त्रिकोणीय संघर्ष में आजसू अऩ्य दोनों पार्टियों को कमजोर कर सकती है.

गौरतलब है कि संबंधित दलों के शीर्ष नेताओं द्वारा टिकट नहीं मिलने से नाराज संथाल के कई कद्दावर नेताओं ने हाल ही में आजसू का दामन थामा है. ऐसे नेता संथाल के कई विधानसभाओं में मजबूत पकड़ रखते हैं. इसमें राजमहल, पाकुड़, महेशपुर और देवघर सीट प्रमुखता से शामिल है.

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संथाल को लेकर सीरियस हैं सभी पार्टियां

राज्य में कमोवेश सभी राजनीतिक पार्टियां संथाल परगना क्षेत्र की सीटों को लेकर काफी सीरियस हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी क्षेत्र के कई विधानसभा को जीत जेएमएम के गढ़ को भेदना चाह रही है.

वहीं जेएमएम अपने गढ़ को बचाने के लिए कांग्रेस के साथ मजबूत गठबंधन के तहत मैदान में है. दूसरी ओर बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम भी संथाल में मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है. वहीं पहली बार आजसू ने संथाल क्षेत्र में एंट्री कर प्रदेश राजनीति में एक तरह से हलचल मचा दी है.

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जानिये किन-किन नेताओं के आने से आजसू हुई मजबूत

  • राजमहल विधानसभा की बात करें, तो यहां से जेएमएम के कद्दवार नेता मो. ताजुद्दीन राजा (एमटी राजा) आजसू में शामिल हो गये हैं. टिकट की आस में आजसू में शामिल हुए एमटी राजा को सुदेश महतो ने राजमहल से प्रत्याशी भी बनाने की घोषणा कर दी है. इससे पहले 2014 के चुनाव में मो. ताजुद्दीन राजा राजमहल से जेएमएम के टिकट पर चुनाव लड़े थे. बीजेपी के सीटिंग विधायक अनंत ओझा (77481) से वे केवल 702 वोट से हारे थे. एमटी राजा को 76779 वोट मिला था. वे दूसरे स्थान पर रहे थे.

 

  • पाकुड़ क्षेत्र से जेएमएम के मजबूत नेता अकील अख्तर ने भी आजसू में शामिल होकर जहां गठबंधन के समक्ष मुश्किल खड़ी कर दी है. वहीं उनका आजसू में आना पार्टी के लिए लाभदायक माना जा रहा है.

गौरतलब है कि अकील अख्तर पाकुड़ से 2009 में जेएमएम के टिकट पर चुनाव जीते थे. 2014 के विधानसभा चुनाव में भी वे जेएमएम प्रत्याशी थे. तब वे दूसरे स्थान पर रहे थे. इस सीट से कांग्रेस के आलमगीर आलम ने 83338 वोट से अकील अख्तर को मात दी थी.

 

  • महेशपुर सीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले जेएमएम के पूर्व विधायक सुफल मरांडी भी आजसू में शामिल हो गये हैं. वे महेशपुर विधानसभा क्षेत्र से आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. अकील अख्तर और मो. ताजुद्दीन राजा के बाद ये जेएमएम के तीसरे नेता हैं, जो टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर आजसू में शामिल हुए. सुफल मरांडी 2005 में महेशपुर सीट से विधायक रह चुके हैं.

 

  • देवघर सीट पर भी आजसू ने अपनी जीत की मजबूत दावेदारी पेश कर दी है. कांग्रेस नेता सह जिला परिषद उपाध्यक्ष संतोष पासवान ने जिस तरह से पार्टी का दामन थामा है, उससे तय है कि वे देवघर सीट से चुनाव लड़ेंगे. पार्टी ने इसकी घोषणा भी कर दी है.

लेकिन सूत्रों का दावा है कि आजसू में शामिल होने से पहले ही उन्होंने पार्टी सुप्रिमो सुदेश महतो के सामने प्रत्याशी के रूप में प्रबल दावेदारी पेश की थी. गौरतलब है कि संतोष पासवान 2014 विधानसभा चुनाव में जेवीएम से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे. फिर उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था. देवघर विधानसभा सीट गठबंधन में आरजेडी के खाते में चला गया था, जिसके कारण उन्होंने आजसू का दामन थामा है.

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