ChatraJharkhandLead NewsNEWSRanchi

JJM: वाटर टेस्टिंग बैकग्राउंड वाले जिन कैंडिडेटों को कॉर्डिनेटर पद के लिए दूसरे जिलों ने किया रिजेक्ट, चतरा में इंजीनियर ने किया सेलेक्ट

Principal Correspondent

Ranchi: चतरा में JJM (जल जीवन मिशन) के कॉर्डिनेटरों (समन्वयक) पर सवाल उठ रहे हैं. आरोप लगाया जा रहा है कि राकेश रौशन (MIS कॉर्डिनेटर) और अवधेश सिंह (IEC कॉर्डिनेटर) का बैकग्राउंड वाटर टेस्टिंग का रहा है. बावजूद इसके चतरा के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का खुब लाड़ प्यार मिला है. उसे जेजेएम में समन्वयक का महत्वपूर्ण पद थमा दिया गया है. जबकि ये दोनों ऐसे कैंडिडेट रहे हैं जिनका दूसरे जिलों में कॉर्डिनेटर के लिए आवेदन सिरे से खारिज कर दिया गया था. कारण उनके पास इस पद के लिए जरूरी योग्यता थी ही नहीं. चतरा के एक समाजसेवी ने इन शिकायतों के साथ पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड के सचिव को चिट्ठी लिखी है. इसमें दोनों इंजीनियर की घूसखोरी और दोनों समन्वयकों की नियुक्ति में विभागीय प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते मामले की जांच करने और नियुक्ति कैंसिल करने का आग्रह किया है.

पीएचइडी पर मालिकाना समझते हैं इंजीनियर

लिखी गयी चिट्ठी में कहा गया है कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अविक अंबाला को चतरा ज्वाइन किये साल भर भी नहीं हुआ है. पर घूसखोरी की तमाम शिकायतें सामने आने लगी हैं. वे पीएचईडी पर अपना मालिकाना हक समझते हैं. यही वजह है कि ऐसे विभागीय अफसर के प्रश्रय पर ही राकेश रौशन और अवधेश सिंह ने चतरा जिले में समन्वयक के पद के लिए आवेदन किया. 5-5 लाख रुपये इंजीनियर को दिए. दोनों को मालूम था कि पलामू सहित दूसरे जिलों में उनके आवेदन स्वीकृत नहीं हो रहे. ऐसे में अंबाला से उन्हें भरोसा मिला और सेलेक्शन भी हो गया.

समाजसेवी ने आरोप लगाते कहा है कि राकेश रौशन ने ज्वाइनिंग के बाद SLWM का पैसा एसबीएम-जी (स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण) का पैसा ऐसे ब्लैक लिस्टेड एजेंसियों को देना शुरू किया जिन पर एफआईआर भी दर्ज है. इसके एवज में अंबाला और रौशन ने एजेंसियों से मोटी रकम भी वसूली है. ऐसे में चतरा कॉर्डिनेटर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के रवैये से पीएचइडी चतरा अपने उद्देश्यों को पूरा करने में पिछड़ रहा है. रौशन और अवधेश की नियुक्ति के मामले में एक ही राज्य में दो कानून कैसे संभव हैं. जिन्हे दूसरे जिलों ने खारिज किया, उसे चतरा में ज्वाइनिंग दिया जाना जांच का विषय है.

मेदिनीनगर में आवेदन था खारिज

शिकायतकर्ता ने अपने लेटर के साथ कई डॉक्यूमेंट भी लगाए हैं. एक में जिला जल एवं स्वच्छता समिति, मेदिनीनगर द्वारा 9.9.22 को जारी एक सूचना है जिसमें बताया गया है कि जिला स्तर पर नियुक्ति के संबंध में प्रारंभिक अभ्यर्थी सूची तैयार की गयी है. इसे जिले के पोर्टल पर भी अपलोड किया गया है. 15 सितंबर 2022 तक इस पर आपत्ति मांगी गयी थी. इसमें एमआइएस कॉर्डिनेटर पद के लिए आवेदन करने वाले राकेश रौशन (पिता-हरिहर महतो, एमएससी-बायोटेक्नोलॉजी, पलामू) के आवेदन को खारिज करते कहा गया कि उन्होंने वर्तमान में कहीं पीएचइडी में कार्य करने का सर्टिफिकेट नहीं दिया था. उम्र सीमा भी अधिक है. साथ ही संबंधित फिल्ड में कार्य करने का अनुभव उन्हें नहीं है. आइइसी कॉर्डिनेटर के लिए भी आवेदन रिजेक्ट करते यही कहा गया. एसबीएम सह एसएलडब्लूएम कॉर्डिनेटर पद के लिए भी उनके आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गया था.

लातेहार जिले में आइइसी कॉर्डिनेटर के लिए जारी मेरिट लिस्ट का कागज भी लगाया गया है. इसमें दिखाया गया है कि राकेश रौशन का नाम इस पद के लिए रिजेक्ट कर दिया गया था. दूसरे जिलों से अनुभव प्रमाण पत्र ना होने, ओवर एज की शिकायत पर रिजेक्ट होने वाले राकेश रौशन और अवधेश कुमार सिंह का चतरा में स्वागत हुआ. आइइसी कॉर्डिनेटर (जेजेएम) तथा एमआइएस कॉर्डिनेटर के लिए अवधेश कुमार सिंह और राकेश रौशन का नाम तय हुआ. अंततः इन्हीं दोनों को योग्य कैंडिडेट को दरकिनार कर सेलेक्ट किया गया है.

इसे भी पढ़ें: न्यूक्लियस मॉल के मालिक विष्णु अग्रवाल की नामकुम जमीन का मामला: जानिए क्यों नहीं कर पाए तत्कालीन डीसी छवि रंजन निबंधन अधिनियम की धारा 82 और 83 के तहत अगव्राल की रजिस्ट्री रद्द (3)

Related Articles

Back to top button