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झारखंड में कृषि शुल्क किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं है, आंदोलन की रणनीति तय होगी : चैंबर

Ranchi : झारखंड विधानसभा से पारित राज्य कृषि उपज एवं पशुधन विपणन विधेयक को राज्यपाल द्वारा सहमति दिये जाने के बाद राज्य के खाद्यान्न व्यापारियों, कृषकों एवं राइस मिलर्स के बीच बन रही असमंजसता की स्थिति को देखते हुए शनिवार को झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स के नेतृत्व में पंडरा के व्यापारियों की संयुक्त बैठक चैंबर भवन में हुई. विधेयक का विरोध करते हुए व्यापारियों ने एकमत से कहा कि झारखंड में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देनेवाला कृषि शुल्क किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जायेगा. अब झारखंड चैंबर आंदोलन की रणनीति तय करे. राज्य के व्यापारी झारखण्ड चैंबर के साथ हैं. व्यापारियों की भावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि 8 फरवरी को रांची में एक राज्यस्तरीय बैठक का आयोजन कर, इस विधेयक के विरोध में आगे की रणनीति पर सामूहिक निर्णय लिये जायेंगे. राज्यस्तरीय बैठक में राज्य के सभी जिलों के खाद्यान्न व्यापारी, कृषि मंडी के व्यापारी, राइस मिलर्स, फ्लावर मिलर्स, कृषक, सभी जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स के अलावा कई व्यापारिक संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे.

चैंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विधानसभा से इस विधेयक के पारित होने के बाद हमने इस विधेयक को वापस लेने के लिए स्थानीय स्तर से लेकर, नई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष स्तर तक के नेताओं से वार्ता की. राज्यपाल और कृषि मंत्री से भी हमें साकारात्मक आश्वासन मिला लेकिन दुखद है कि झारखण्ड में अनियमितताओं को बढ़ावा देने के लिए इस विधेयक को प्रभावी करने की दिशा में पहल आरंभ की जा चुकी है, जिसका व्यापारी विरोध करते हैं. पंडरा बाजार समिति के अध्यक्ष संजय माहुरी ने कहा कि इस विधेयक के प्रभावी होने के बाद खाद्यान्न व्यापारियों के अलावा मत्स्य पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, बागवानी करनेवाले सभी लोग दायरे में आयेंगे. जिसका प्रभाव शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर पडेगा. राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार के नियमों का हवाला देते हुए इस शुल्क को प्रभावी किया जा रहा है. लेकिन केंद्र सरकार के एक्ट में राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसे लागू करने की बात कही गई है. ऐसे में जब झारखण्ड पठारी क्षेत्र है और यहां अधिकांश वस्तुएं अन्य राज्यों से आयातित होती हैं, तब किस आधार पर इस शुल्क को प्रभावी किया जा रहा है. बैठक में चैंबर के सदस्य शामिल रहे.

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