
Ranchi: धनबाद जिला के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक बांके बिहारी सिंह पर छह साल पुराने मामले में कार्रवाई की गयी है. उन्हें शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. उन पर यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद आयी रिपोर्ट के आधार पर की गयी है. साथ ही शिक्षा मंत्री ने उन पर विभागीय कार्रवाई करने को भी कहा है.
धनबाद के पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक रहे बांके बिहारी सिंह वर्तमान में जामताड़ा जिला में जिला शिक्षा पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. जहां से उन्हें हटाया गया है. शिक्षा मंत्री ने छह साल पुराने मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की है.
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बगैर टेंडर के ही स्कूलों में बोरिंग
जानकारी के मुताबिक धनबाद में जिला शिक्षा अधीक्षक के पद पर रहते हुए बांके बिहारी सिंह ने वर्ष 2013-14 में बगैर टेंडर के ही 144 स्कूलों में चापाकल के लिए बोरिंग कराया था. झारखंड अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षा संघ के महासचिव राम नारायण सिंह ने इन स्कूलों में चापाकल लगाने में घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी. बांके बिहारी सिंह ने बिना टेंडर के प्रत्येक स्कूलों में 200 फीट के स्थान पर 100 फीट की बोरिंग करायी थी. जबकि उनके द्वारा भुगतान 200 फीट का किया गया था. प्रत्येक स्कूल में 55 सौ रुपये से लेकर 24,000 रुपये तक अधिक का भुगतान किया गया था.
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पहले भी लग चुके हैं कई आरोप
ऐसा नहीं है कि बांके बिहारी सिंह पर चापाकल बोरिंग घोटाला एकमात्र आरोप है. उन पर धनबाद में डीएसई रहते हुए शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी करने का भी आरोप है. वर्ष 2015-16 में जब बांके बिहारी धनबाद के जिला शिक्षा अधीक्षक थे, उनके कार्यकाल में कई फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. बांके बिहारी सिंह वर्ष 2018 में पूर्वी सिंहभूम जिले में भी जिला शिक्षा अधीक्षक रह चुके हैं. तब उनके इस घोटाले की जांच विभाग के संयुक्त सचिव देवेंद्र भूषण सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमिटी ने की थी.
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