
Ranchi: झामुमो के पूर्व विधायक और विधानसभा के पूर्व स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता राज्य में बदलती सियासत से निराश हैं. वर्तमान राजनीति में झारखंड आंदोलनकारियों की उपेक्षा की शिकायत की है. सोशल मीडिया के जरिए अपनी पीड़ा भी जाहिर की है. कहा है कि पार्टी अब नयी राजनीति के साथ बढ़ने को है. नई पीढ़ी नये नारों के साथ बढ़ रही है. “आबु बाबन बतावा, झारखंड राज हतावा” का नारा अपना औचित्य खो चुका है
क्या कहा है पूर्व स्पीकर ने
पूर्व स्पीकर के मुताबिक, उनके समर्थक निराश हैं. जनता गुण-दोष के आधार पर अपने उम्मीदवार को चुनती है. पर समर्थक अपने नेता से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं. निराशा स्वाभाविक है. 40 साल तक जुड़े रहना, दिल में एक नजदीकी पैदा कर देता है. सबको मेरी शुभकामनाएं. शशांक ने कहा है कि जनता का निर्णय सर्वोपरि है. 35 सालों से पार्टी (झामुमो) की सेवा की. पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया. मैंने भी पार्टी को सारठ में खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई. अब पार्टी की भूमिका में आमूलचूल बदलाव परिलक्षित हो रहा है. झारखंड आंदोलनकारियों की भूमिका खत्म हो रही है. नई पीढ़ी नये नारों के साथ बढ़ रही है.”आबु बाबन बतावा, झारखंड राज हतावा” का नारा अपना औचित्य खो चुका है. दबे-कुचले लोगों की पार्टी में अभिजात्य जीवों का प्रवेश हो चुका है. उनके लिए 1990 दशक के, हमें “सोंतार पार्टी” के तमगे चस्पा करने वाले, उसी गंगाजल में डुबकी लगा रहे हैं. शायद यह पार्टी का “जेनेरेशन गैप” है.
नयी पीढ़ी भार उठाने में सक्षम
हेमंत सोरेन और दूसरों का नाम लिए बगैर पूर्व स्पीकर ने कहा है कि वे पूरी तरह मानते हैं कि नई पीढ़ी पार्टी का भार उठाने में पूरी तरह सक्षम है. नई सोच तथा नये तेवर के साथ आगे बढ़ेगी. हमारी शुभकामनाएं साथ हैं. अभी सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणियों की भरमार है. कम्प्यूटराइज, सद्यजात, नये-नवेले झारखंडी इसके माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन कराने को आतुर हैं. राजनीतिक शुचिता को अलविदा कह दिया गया है. राजनीति का मतलब,”जो जीता वही सिकंदर”, रह गया है. नैतिकता, सिद्धांत छोड़ कर समय के ताल के साथ चलना ही बुद्धिमानी है.



