
Ranchi: खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिख कर जल और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों को घोषणा पत्र में शामिल करने का आग्रह किया है. उन्होंने 18 बिंदुओं से संबंधित विषयों को चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा बनाने की मांग की है. उन्होंने लिखा है कि 14 वर्षों में मैंने दामोदर बचाओ और सेव सारंडा फारेस्ट कैंपेन में शिरकत की है. उन्होंने कहा है कि आनेवाले दिनों में स्वच्छ जल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनेगी. ऐेसे में मनुष्यों के अलावा वन्य प्राणियों को जीने के लिए स्वच्छ जल को बरकरार रखना होगा. उन्होंने कहा है कि नदियां, तालाब, ग्राउंड वाटर तेजी से कम हो रहे हैं. स्वच्छ जल सिर्फ मानव जाति को ही नहीं, कृषि के लिए भी उतना ही आवश्यक है. आर्थिक विकास और आधारभूत संरचना के विकास में भी पानी की आवश्यकता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है, क्योंकि बगैर पानी के न तो सड़क और न ही पुल-पुलिया का निर्माण हो सकेगा.
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तकनीकी रूप से संरक्षित करने पर हो जोर
उन्होंने घोषणा पत्र में जल संरक्षण और सभी तरह के नदी, तालाब, आहर, पोखर को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से संरक्षित करने पर बल दिया जाना चाहिए. इससे पारिस्थिकीय संतुलन कायम हो सकेगा. उन्होंने कहा कि बाढ़ की विभीषिका से निबटने के लिए ग्राउंड वाटर को रीचार्ज करने पर भी बल दिया जाना चाहिए. जिन भारतीय नदियों के पानी का बहाव कम हो रहा है और जहां अत्यधिक प्रदूषण है, उसे बचाने की दिशा में भी पहल करनी चाहिए.
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जंगलों को बचाने की दिशा में कार्य हो
श्री राय ने कहा है कि हमें जंगलों को बचाने की दिशा में काम करने चाहिए. इससे नदियों का जल स्तर बढ़ेगा. उन्होंने पर्यावरण में हो रहे अप्रत्याशित बदलाव को ग्लोबल तरीके से ढूंढ़ना होगा और उसका निराकरण स्थानीय तरीके से खोजना होगा. गंगा की पारिस्थिकी को बचाते हुए तेजी से कार्रवाई करनी होगी. गंगा को बचाने के लिए समेकित विकास योजना बनाने की जरूरत है. वन संरक्षण कानून 1986 और इआइए नोटिफिकेशन 2006 को स्थानीय आधार पर लागू करने की जरूरत है. केंद्र और राज्य सरकारों के प्रदूषण नियंत्रण पर्षदों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. खनन क्षेत्र, उद्योगों, हेवी वेहिकल ट्रांस्पोर्टेशन क्षेत्रों में ऑन लाइन रीयल मानिटरिंग सिस्टम स्थापित करने की जरूरत पर भी ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने कारपोरेट सामाजिक दायित्व की तरह कारपोरेट पारिस्थिकीय दायित्व को भी प्रभावशली बनाने पर बल दिया है.
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