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उग्रवाद के खात्मा तक जारी रहे विशेष केंद्रीय सहायता, बकाया 1.36 लाख करोड़ का जल्द हो भुगतान: मंत्री

Ranchi: झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने 16वें वित्त आयोग के सदस्यों का स्वागत किया और राज से जुड़ी संस्कृतिव और परंपरा का भी जिक्र करते हुए कई मांग रखी. वित मंत्री ने कहा कि नृत्य, गीत, संगीत तथा हरे-भरे जंगलों से परिपूर्ण जनजातीय संस्कृति वाले झारखंड राज्य के 79,716 वर्ग किमी में अवस्थित झारखंड राज्य में विद्यमान खनिज, खदान और वन संपदा प्रकृति का एक अनुपम उपहार है. 15 नवम्बर 2000 को झारखंड राज्य के निर्माण से यहाँ के लोगों में अत्यंत खुशी थी. खुशी में मग्न झारखंडवासी मांदर की थाप पर महीनों तक झूमते रहे. विकास की आस में जनजातीय वाद्य यंत्र नगाड़ा, मांदर, बांसुरी और ढुंढूंगा के सुरताल की लहरें गूंज रही थी.

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हमारा दुर्भाग्य यह था कि एक ओर जहां झारखंड राज्य का निर्माण हुआ वहीं हमें सामाजिक-आर्थिक विषमता और उग्रवाद की समस्या विरासत में मिली. उग्रवाद की समस्या के कारण झारखंड का विकास प्रभावित रहा. राज्य के गर्भ में अनेक महत्वपूर्ण खनिज संपदाओं का भंडार था. वहीं दूसरी ओर झारखंड की जमीन लैंड माइन्स और बारूद से पटी पड़ी थी. पारंपरिक वाद्य यंत्रों की आवाज़, रायफलों एवं बंदूकों की गड़गड़ाहट में दब कर रह गई थी. समय बीतता गया, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कुशल नेतृत्व में राज्य और केंद्रीय पुलिस बल के सहयोग से उग्रवाद की समस्या पर हद तक नियंत्रण प्राप्त किया जा सका है. लेकिन याद रहे कि उग्रवाद की समस्या नियंत्रित हुई है, खत्म नहीं.

मुख्य बिंदु इस भाषण से:

  1. कृषि आधारित असंतुलित अर्थव्यवस्था – 70-80% आबादी कृषि पर निर्भर, सिंचाई क्षमता की भारी कमी, भू-क्षरण की तीव्र समस्या.

 

  1. जल संकट – केवल 20% वर्षा जल का संचयन, भूजल स्तर गिरता जा रहा है, विशेष वित्तीय सहायता की आवश्यकता.

 

  1. उग्रवाद – पूर्ण रूप से समाप्त नहीं, 200 पुलिस कैम्प हटाने पर पुनः पनपने की संभावना, पुलिस बल की भारी कमी. अगले पांच वर्षों तक मिले विशेष केंद्रीय सहायता.

 

  1. स्वास्थ्य – 65% महिलाएं एनीमिक, 40% बच्चे कुपोषित, डॉक्टर व नर्स की भारी कमी.

 

  1. सड़क और ग्रामीण पथ – राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे, दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन कठिन, 21,000 किमी नई सड़क और 26,000 किमी पुरानी सड़कों की मरम्मत की योजना.

 

  1. उच्च शिक्षा – केवल 38 विश्वविद्यालय, नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से कम (20% बनाम 28.4%).

 

  1. प्रति व्यक्ति आय – ₹1,05,274 प्रतिवर्ष, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम, झारखंड 26वें स्थान पर.

 

  1. कृषि सहायक क्षेत्र (दूध, मछली पालन) – राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे, केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता.

 

  1. बैंक सहयोग की कमी – CD रेशियो केवल 50.68%, CSR फंड के उपयोग में पारदर्शिता की कमी.

 

  1. केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत बकाया राशियाँ – जैसे मनरेगा, जल जीवन मिशन, पेंशन योजनाएं, कोयला कंपनियों पर बकाया ₹1.36 लाख करोड़.

 

  1. वित्तीय प्रबंधन – बजट 2024-25: ₹1.28 लाख करोड़; GSDP: ₹5.06 लाख करोड़, राजकोषीय घाटा 2.27% (FRBM सीमा से कम), स्व-कर संग्रह लक्ष्य का 83.56% प्राप्त.

 

  1. अनुदान में गिरावट – 2019-2025 के बीच कुल वित्तीय क्षति ₹25,435.84 करोड़.

 

  1. GST क्षतिपूर्ति की मांग – अगले 5 वर्षों में ₹61,677 करोड़ की संभावित हानि.

 

  1. विकास सहायता की मांग – ₹3,03,527.44 करोड़ की मांग की गई विभिन्न विभागों से.

वित मंत्री ने कहा कि कृषि आधारित असंतुलित अर्थव्यवस्था खनिज से समृद्ध होने के बावजूद झारखंड की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है. लगभग 70-80% आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है. राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.74 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जबकि मात्र 24.25 लाख हेक्टेयर में ही सिंचाई क्षमता का सृजन हो पाया है. राज्य निर्माण के बाद कुल 10.06 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया. शेष 14.19 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है.

भू-क्षरण एवं मृदा मरुस्थलीकरण की दर बहुत तीव्र है – लगभग 69% भूभाग इसकी चपेट में है. इससे मृदा की नमी एवं जल धारण क्षमता प्रभावित होती है जिससे कृषि उत्पादकता एवं उपज प्रभावित होती है.

जल संचयन झारखंड एक “रेन शैडो” राज्य है. प्रत्येक वर्ष के बाद राज्य को सूखा का सामना करना पड़ता है. झारखंड का सामान्य वर्षा 1300 मिमी है. अपने संसाधनों से हम मात्र 20% ही वर्षा जल का संचयन कर पाते हैं. शेष 80% वर्षा जल बह कर चला जाता है, जिससे भूजल भंडार पर भी कुप्रभाव पड़ता है. भूजल घटकर वर्तमान में 5.76 बिलियन क्यूबिक मीटर रह गया है. प्रति व्यक्ति वार्षिक जल उपलब्धता 1341 क्यूबिक मीटर है, जो जल तनाव (Water Stress) की श्रेणी में आता है.

उग्रवाद राज्य निर्माण से पहले से ही झारखंड क्षेत्र में माओवादियों का तांडव था. सामाजिक-आर्थिक विषमता और प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले आर्थिक लाभ के कारण उग्रवाद फलता-फूलता रहा. मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के कुशल नेतृत्व और भारत सरकार के बेहतर तालमेल के कारण उग्रवाद पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है, लेकिन यह पूर्णतः समाप्त नहीं हुआ है. लगभग 200 पुलिस कैंप हैं जो हटाए जाने पर पुनः उग्रवाद पनप सकता है. जरूरत है उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की, झारखंड पुलिस को और मजबूत करने की, जिसमें केंद्र सरकार की सहायता आवश्यक है.

स्वास्थ्य झारखंड में लगभग 40% जनसंख्या गरीबी में जीवन यापन कर रही है.  26% आबादी आदिवासी तथा 14% अनुसूचित जाति की है.

वित आयोग के साथ इस बैठक में मंत्री राम दास सोरेन, मुख्य सचिव अलका तिवारी, वित्त सचिव प्रशांत कुमार सहित मंत्री और अधिकारी शामिलथे.

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