
Ranchi : लंबे समय से आंदोलनरत पारा शिक्षकों की मांगों को उचित बताते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि राज्य की रघुवर सरकार अब अपने दमन की सीमा पार कर चुकी है. विगत 15 नवंबर को जिस तरह सरकार ने पारा शिक्षकों के प्रति बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की, उसकी जितनी भी निंदा की जाये, वह कम है. शुक्रवार को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरने के दौरान उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान अब तक नौ पारा शिक्षकों की मौत हो चुकी है. एक पारा शिक्षक लापता है. इसके लिए राज्य की निरंकुश रघुवर सरकार पूर्णरूप से जिम्मेदार है. इस दौरान उन्होंने सभी स्तर के अनुबंधित कर्मचारियों के साथ कांग्रेस पार्टी के खड़ा रहने की भी बात कही.
राज्य भर में आयोजित हुआ एक दिवसीय धरना
शुक्रवार को पारा शिक्षकों की मांगों के समर्थन में कांग्रेस पार्टी द्वारा एकदिवसीय राज्यव्यापी आंदोलन किया गया. यह आंदोलन झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के निर्देश पर किया गया था. इस दौरान सभी जिला मुख्यालयों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम पर जिला उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा गया. राजधानी में यह धरना रांची जिला ग्रामीण कांग्रेस कमिटी जिलाध्यक्ष सुरेश बैठा के नेतृत्व में आयोजित किया गया था.
सरकार बनने पर मांगों को समायोजित करेगी पार्टी
धरना को संबोधित करते हुए सुरेश बैठा ने कहा कि राज्य के 67 हजार पारा शिक्षक वर्षों से अपनी सेवा देते आ रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का सारा दारोमदार इन्हीं शिक्षकों पर है. उन्होंने कहा कि 67 हजार पारा शिक्षकों के अलावा मनरेगा, रसोइया, संयोजिका संघ, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका के साथ-साथ होमगार्ड और चौकीदार-दफादार संघ भी सरकार के खिलाफ अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर हैं. लेकिन, सरकार का इनकी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं है. ऊपर से इन पर लाठियां बरसाकर इनके आंदोलन को कुचलना चाह रही है. कहा कि अगर 2019 में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनती है, तो 10 दिनों के अंदर इनकी मांगों पर पहल करते हुए इन्हें समायोजित करने का काम करेगी.
ओछी मानसिकता का परिचायक है सीएम का बयान : लाल किशोर नाथ शाहदेव
पार्टी प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने बताया कि राज्य सरकार ने इन पारा शिक्षकों पर लाठीचार्ज कराया और उनपर झूठा मुकदमा दायर जेल तक भेजने का काम किया. वर्तमान में भी पारा शिक्षक ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ कार्यक्रम के तहत मंत्री आवास के समक्ष धरना दे रहे हैं. दुर्भाग्य की बात है कि सरकार अब तक चुप्पी साधे हुए है. सरकार का यह रवैया मानवाधिकार का हनन करता है. दूसरी ओर सीएम इन पारा शिक्षकों को गुंडा कह रहे हैं, जो कि सीएम की ओछी मानसिकता का परिचायक है.
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