
Ranchi: झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष शशिकर सामंत ने कहा कि हमें एक साथ व्यवस्थित ई-कचरा (अपशिष्ट) संग्रह और इस पर सामुदायिक शिक्षा की दिशा में काम करना है. श्री सामंत शुक्रवार को वन भवन डोरंडा के पलास सभागार में आयोजित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का इ-वेस्ट मैनेजमेंट पर विशेषज्ञों की पैनल डिस्कशन कार्यक्रम बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड इ-वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर प्रयास को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
दुनिया भर में 57.4 मिलियन टन ई-कचरा उत्पन्न होता है: वाई के दास
मौके पर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव वाईके दास ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस ग्रह पर प्रत्येक व्यक्ति औसतन 7.6 किलोग्राम ई-कचरा (अपशिष्ट) पैदा कर रहा है, जिसका अर्थ है कि दुनिया भर में 57.4 मिलियन टन ई-कचरा उत्पन्न होता है. इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए सीपीसीबी और जेएसपीसीबी द्वारा कई पहल की गयी है, लेकिन उनमें से कोई भी बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं की सक्रिय भूमिका और सही शिक्षा के बिना पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो सकती है.
कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति
इस विषय पर सरकार, शिक्षा जगत और औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये. प्रमुख वक्ताओं में डॉ दिनेश कुमार सक्सेना, अवर मुख्य वन संरक्षक, प्रशांत बोस, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, हेड टेक्निकल, हिंडाल्को मूरी यूनिट, डॉ गंगा प्रसाद सिंह, डायरेक्टर, आइएसएम रांची, अर्चना शरण, जीएम ऑटोमेशन, सी एंड आइटी सेल-आरडीसीआईएस, डॉ बी संतोष रमेश, उप प्रबंधक, पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुभाग, मेकॉन, देबनाथ बेरा, सीइओ रांची पार्टनर्स मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स प्रइवेट लिमिटेड थे. इसके अलावा इसमें एक्सआइएसएस, रांची, अमिटी विश्वविद्यालय, आइएसएम पुंदाग, आइसीएफएआइ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया. साथ ही टाटा मोटर्स, टाटा पावर, इनलैंड पावर, हिण्डाल्को मुरी सहित कई इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि हिस्सा लिए.
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