
Rana Pratap Singh
Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि राज्य सरकार की गलती के कारण नियुक्ति में हुई देरी का खामियाजा सफल अभ्यर्थी नहीं भुगत सकते हैं. हाईकोर्ट ने ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह वर्ष 2008 में सहायक अभियंता के लिए निकाले गए विज्ञापन के आधार पर वर्ष 2009 में सर्वप्रथम नियुक्त सफल अभ्यार्थियों के समकक्ष ही वर्ष 2011 में नियुक्त सहायक अभियंता (आईटी कैडर) की नियुक्ति तिथि निर्धारित करने पर जल्द निर्णय ले. यानी एक ही विज्ञापन के तहत करीब 3 वर्ष देर से सरकार द्वारा नियुक्त किए गए सफल सहायक अभियंता (आईटी कैडर) की नियुक्ति तिथि भी वर्ष 2009 में नियुक्त सहायक अभियंता की नियुक्ति तिथि मानी जानी चाहिए . दरअसल, वर्ष 2008 में तत्कालीन झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड में सहायक अभियंता के लिए झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड ने विज्ञापन संख्या 1/ 2008 निकला था. इनमें से कई सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति वर्ष 2009 में हो गई थी. लेकिन सहायक अभियंता (आईटी कैडर) के कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति तकनीकी कारण से नहीं की गई थी. इसके खिलाफ अमित कुमार सिंह, घासीराम सरदार एवं अन्य की ओर से हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी. जिस पर कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी नियुक्ति करने का निर्देश विद्युत बोर्ड को दिया था. हाई कोर्ट के एकल पीठ की इस आदेश के खिलाफ झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड की ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी. बिजली बोर्ड की इस अपील को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सफल सहायक अभियंता ( आईटी कैडर) की नियुक्ति नहीं होने पर उनकी ओर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी. इसी दौरान 21अक्टूबर 2011 को हाई कोर्ट परिसर में ही प्रार्थियों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया था. लेकिन वर्ष 2015 में प्रार्थियों अमित कुमार सिंह, घासीराम सरदार एवं अन्य की ओर से इसी विज्ञापन से सर्वप्रथम नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों की नियुक्ति तिथि के समक्ष उनकी भी नियुक्ति तिथि करने को लेकर अभ्यावेदन बिजली बोर्ड को दिया गया था. जिसमें उनका कहना था कि नियुक्ति पत्र देने में देरी बिजली बोर्ड के कारण हुई है इसलिए उनकी भी नियुक्ति तिथि वर्ष 2009 से ही मानी जाए. अभ्यावेदन पर कुछ नहीं होने पर उनकी ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई. जिस पर सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन एवं अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2011 में नियुक्ति पत्र निर्गत किए जाने से वह अपने समकक्ष नियुक्त हुए अभ्यार्थियों से वरीयता में पीछे हो जाएंगे. साथ ही वर्ष 2009 में नियुक्त उनके समक्ष के अभ्यर्थियों को मिलने वाली सेवालाभ से भी वे वंचित रह जाएंगे , समयबद्ध प्रमोशन में भी वे पीछे हो जाएंगे. उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई आदेश का हवाला दिया गया. जिस पर कोर्ट ने झारखंड ऊर्जा विकास निगम को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द प्रार्थियों के नियुक्ति तिथि उनके समक्ष के अभ्यर्थियों के समान करने पर निर्णय लें. उक्त दिशा निर्देश देते हुए कोर्ट ने प्रार्थियों की याचिका निष्पादित कर दी.



