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शिवराज चौहान का हेमंत से सवाल: झारखंड में सरकार तो बदली पर किधर है अधिकार?

Ranchi: केंद्रीय मंत्री एवं झारखंड भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान अब लगातार झारखंड सरकार को निशाने पर ले रहे हैं. नजर इस साल के आखिर में झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव पर जो है. झारखंड का चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद से संगठनात्मक गतिविधियों और अन्य कार्यक्रमों में भागीदारी दिखा रहे हैं, खासकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार की विफलताओं पर भी खूब नजर बनाए हुए हैं. रविवार को मीडिया प्रतिनिधियों संग अनौपचारिक बातचीत में भी उन्होंने हेमंत सरकार पर जनता से वादाखिलाफी करने, छलने का आरोप लगाया. कहा कि करीब पांच साल इस सरकार के होने को हैं. 2019 में चुनाव के समय संकल्प पत्र जारी करते कहा था- बदलो सरकार, पाओ अधिकार. सरकार बदल भी गयी पर लोगों को कौन सा अधिकार, न्याय यह अबतक दे सकी है? इसने युवाओं को नौकरी, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने के नाम पर ठगा. महिलाओं, बेटियों, किसानों सहित हर वर्ग को ठगा. चुनाव के समय इस ठगबंधन सरकार की हकीकत जनता के सामने भाजपा ले जाएगी.

दो वर्ष में खाली पड़े पदों पर नौकरी का वादा

शिवराज ने 2019 के विधानसभा चुनाव के समय झामुमो और कांग्रेस की ओर से जारी संकल्प पत्र के बिंदुओं की चर्चा की. कहा कि झामुमो करीब 150 विषयों पर जबकि कांग्रेस ने तो 317 बिंदुओं पर काम करने का भरोसा दिलाया था. कहा गया था कि दो साल के भीतर राज्य के सभी खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां कर दी जाएंगी. बेरोजगारों को भत्ता मिलेगा. हेमंत बताएं कि कितनों को यह भत्ता दिया. महिला बैंक की स्थापना राज्य भर में करने, केवल आधार कार्ड के आधार पर 50 हजार रुपए का लोन मिलने का भरोसा दिया था. एक को भी मिला? नहीं. गरीब परिवार की महिलाओं को चूल्हा खर्च के नाम पर 2000 रुपए हर माह देने की बात का क्या हुआ. रघुवर सरकार में तो 50 लाख रुपए तक की संपत्ति महिलाओं के नाम एक रुपया पर किया जा रहा था. किसान के लिए किसान बैंक और  इसके जरिए मदद की बात हेमंत सरकार ने की थी, क्या हुआ इसका. रघुवर सरकार में किसान समृद्धि योजना थी. प्रति किसान प्रति एकड 5000 रुपए दिए जाते थे. इसे हेमंत ने बंद करा दिया. हेमंत सरकार ने पलामू, गढ़वा, गिरिडीह, चाईबासा, दुमका, देवघर को बेहतर शहर के तौर पर विकसित करने को 25 हजार करोड़ रुपए के प्रावधान की बात की, सब गायब है. राज्य में खनन नहीं, पर्यटन की बात भी ढकोसला साबित हुई. केवल खनन ही हो रहा, वह भी अवैध.  बालू किलो के भाव से यहां बेचे जा रहे. आम लोगों को इसमें परेशानी हो रही.

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