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बुंडू के दशम फॉल रोड से तिलाईपीड़ी तक सड़क जर्जर, ग्रामीणों ने रिपेयरिंग को लेकर खुद बीड़ा उठाया, श्रमदान कर चलने योग्य बनाया सड़क

Bundu: बुंडू प्रखंड के बारुहातू पंचायत के दशम फॉल रोड से तिलाईपीड़ी तक सात किलोमीटर जर्जर सड़क को ग्रामीणों ने कुदाली, साबर लेकर उक्त सड़क पर आए और सड़क को चलने लायक बनाया. श्रमदान से बना कर चलने योग्य बनाया.

यह सड़क पहाड़ी होने के करण बड़ी बड़ी गड्ढे पानी के बहाव से बन जाते हैं जिससे ग्रामीणों को आवागमन में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. आलम यह है कि ग्रामीण को मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए खटिया में ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है. यहां ना तो एंबुलेंस पहुंच सकती है और ना कोई गाड़ी ही पहुंच सकती है. इन लोगों का जीवन सड़क नहीं होने के कारण नरकीय हो गया है.

ग्रामीणों का कहना है कि एक बार जिला उपायुक्त ने इस सड़क पर आए थे उस वक्त मोरम मिट्टी भराई कार्य किया गया था तथा उन्होंने ग्रामीणों से सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों को कहा भी था परंतु स्थिति बदतर हो गई.

इस सड़क पर दर्जनों गांव बाड़ेदा, गयाजारा, ऊपर गयाजारा, रोशेन, चुनिंदा, कुजीराम, हांजेद, पानसकम के अलावे प्रखंड के तीन पंचायत चुरगी, तैमारा, बारुहातू पंचायत के लोगों का आना-जाना प्रभावित हो गया है, लेकिन आजादी के बाद से उक्त सड़क को नहीं बनाया जा सका है. यहां के विधायक विकास कुमार मुंडा को उक्त गांव के लोगों ने कई बार आवेदन दिया उनके पास जाकर भी कहा लेकिन उन्होंने ग्रामीणों के इस मांग को नजरअंदाज कर दिया.

पूर्व मुखिया ने सड़क पर रखी अपनी बात, कहा- तमाड़ विधायक को आवेदन दे दे कर थक चुके हैं

बारूहातु पंचायत के पूर्व मुखिया कुंवर सिंह मुंडा ने कहा कि सड़क की अत्यधिक खराब होने के कारण ग्रामीणों के श्रमदान से इस सड़क का मरम्मती कर चलने योग्य बनाया जा रहा है बरसात के मौसम में बहता पानी से यह सड़क काफी जर्जर हो जाता है इसमें ना तो चार पहिया वाहन आ सकती है और ना ही दो पहिया वाहन ही इस पर गुजर सकती है काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है कुल 12 किलोमीटर की सड़क पर मात्र पांच किलोमीटर सड़क बनाकर छोड़ दिया गया है तथा 7 किलोमीटर सड़क का निर्माण अत्यधिक आवश्यकता है बच्चे ना तो स्कूल जा पाते हैं और ना ही कोई मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए व्यवस्था कर पाते हैं उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि इस मामले में संज्ञान लेकर सड़क निर्माण कार्य कर कर हमें सुविधा प्रदान करें.

स्वास्थ्य सहिया के रूप में गांव में कार्य करने वाली दुर्गामनी देवी ने क्या कहा

स्वास्थ्य सहिया के रूप में गांव में कार्य करने वाली दुर्गामनी देवी ने कहा कि सड़क इतनी जर्जर है कि इस पर चलना दुर्भर हो जाता है मरीज को खटिया से ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है एंबुलेंस भी इस सड़क पर आने से कतराते है छोटे-छोटे बच्चों को विद्यालय जाने में परेशानी होती है गिरते पड़ते किसी तरह से विद्यालय पहुंच पाते हैं.

जानिए क्या कहा पूर्व वार्ड पार्षद ने

पूर्व वार्ड दुबराज पातर का कहना है कि इस सड़क को लेकर सभी को बहुत परेशानी हो रही है बीते 2019 के लोकसभा चुनाव में के पूर्व इस सड़क नहीं बनने के विरोध में रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा देकर वोट बहिष्कार भी किए थे जिसको लेकर ग्रामीण पर प्राथमिक की भी दर्ज की गई थी इसके बाद प्रखंड कार्यालय के बड़ा बाबू के द्वारा समझे जाने तथा आश्वासन देने के बाद हम सभी ने वोट दिया परंतु वोट के समाप्ति के पश्चात लगातार आवेदन देने के बावजूद सड़क निर्माण नहीं कराया गया स्थानीय विधायक विकास कुमार मुंडा को कई बार आवेदन दिया गया परंतु 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्होंने इस सड़क निर्माण कार्य को नहीं करा सके अगर दिसंबर तक यह सड़क नहीं बनाई जाती है तो विधानसभा चुनाव के लिए नए विकल्प के रूप में किसी अन्य व्यक्ति को विधायक चुना जाएगा।

जानिए ग्रामीणों की राय

सड़क पर श्रमदान कर रहे है एक स्थानीय ग्रामीण माड़की मुंडा ने कहा कि तीलाईपीढ़ी से हांजेद चौक तक यह सड़क जाती है जो पूरी तरह से जर्जर स्थिति में है. ग्रामीणों के द्वारा श्रमदान कर इस सड़क की मरम्मतीकारण कर चलने योग्य बनाया जाता है स्थानीय प्रतिनिधि सांसद तथा विधायक के पास सड़क निर्माण के आवेदन को लेकर जा चूके है परंतु वह लोग इसपर ध्यान नहीं देते हैं.

सीपीआई (एम) के तमाड़ प्रत्याशी सुरेश मुंडासूचना मिलते ही सीपीआई (एम) के तमाड़ प्रत्याशी सुरेश मुंडा ग्रामीणों से मिलने पहुंचे

तमाड़ विधानसभा प्रत्याशी सुरेश मुंडा मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से मिलकर इस सड़क के विषय पर चर्चा की तथा वह हर संभव ग्रामीणों के साथ खड़े रहकर सड़क निर्माण को सरकार से मांग करने की बातें कहीं उन्होंने कहा कि अगर इस सड़क को ग्रामीणों के लिए सरकार उपलब्ध नहीं करा पाती है तो उसके लिए वह आंदोलन का रूप तैयार करेंगे ग्रामीणों ने उनका स्वागत करते हुए अपने पीड़ा व्यक्त किया.

अब इस मामले में सरकार इनकी मांग पर विचार करती है या ग्रामीण आगामी विधानसभा चुनाव में नए विकल्प को खोजने में सफल हो पाती है यह तो आनेवाली विधानसभा चुनाव की रिजल्ट बताएगी. बहरहाल आदिवासी बहुल दर्जानों गांव के लोगों को अब अपने जनप्रतिनिधियों से ठगा हुआ महसूस कर रही है.

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