
Ranchi: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजे बोर्ड), चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्ल्यूसी ) व राज्य बाल संरक्षण आयोग में रिक्त पदों को लेकर दायर बचपन बचाओ आंदोलन की जनहित याचिका पर सुनवाई सोमवार को झारखंड हाइकोर्ट में हुई. मामले में प्रार्थी की ओर से शपथ पत्र दायर कर बताया गया कि जेजे बोर्ड, सीडब्ल्यूसी में अभी तक 152 पद ही भरे जा सकते हैं, 184 पद अभी भी रिक्त है. सुप्रीम कोर्ट के संपूर्ण बेहुरा केस में राज्य सरकारों को कुछ गाइडलाइन दिया गया है, जिसका इन्हें पालन करना है. संपूर्ण बेहुरा केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देश के तहत जेजे बोर्ड की मॉनिटरिंग राज्य सरकार एवं हाई कोर्ट को करनी है. वही, सीडब्ल्यूसी और जेजे बोर्ड का सोशल ऑडिट भी किया जाना है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में प्रार्थी द्वारा दिए गए शपथ पत्र की आलोक में राज्य सरकार को प्रतिउत्तर देने का निर्देश देते हुए मामले के अगली सुनवाई 21 मार्च निर्धारित की है. बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से जगजीत सिंह छाबड़ा वर्चुअल कोर्ट में उपस्थित हुए , वहीं अधिवक्ता अमित कुमार तिवारी, निधि रानी एवं दीपमाला ने फिजिकली रूप से कोर्ट के समक्ष पक्ष रखा.
बता दें कि कोर्ट को पूर्व में राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि जेजे बोर्ड व सीडब्ल्यूसी के अधिकतर पदों पर नियुक्ति कर दी गयी है, लेकिन अब भी कई पद खाली हैं. वहीं राज्य बाल संरक्षण आयोग में अध्यक्ष व सदस्य का पद कई वर्ष से खाली हैं. पद खाली रहने के कारण आयोग सही तरीके से काम भी नहीं कर पा रहा है. प्रार्थी बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गयी है.
इसे भी पढ़ें: समन की अवहेलना मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की शिकायतवाद पर सीजेएम कोर्ट ने लिया संज्ञान, अब चलेगा मुकदमा




