
Ranchi: सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के द्वारा राजभवन के समक्ष राज्य में व्याप्त शैक्षणिक कुव्यवस्था की शिकायतों को लेकर एकदिवसीय छात्र हुंकार धरना का आयोजन किया गया. इसमें सभी चौबीसों जिले से आए हजारों स्टूडेंट्स भी शामिल हुए.
धरना को संबोधित करते अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि आंदोलन छात्रों के रोजगार, उनके बेहतर भविष्य के लिए है ताकि आने वाली पीढ़ी हमसे यह सवाल ना करे कि जब झारखण्ड में लूट मची थी, तो हम कहां थे. जिस प्रदेश में 18 घंटे तक सीएम नहीं बनता है वहां हाहाकार मच जाता है. इसी तरह अभी 264 दिनों से झारखण्ड के विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति, स्थायी कुलसचिव नहीं हैं. बहुत से डिग्री कॉलेजों में स्थाई प्राचार्य नहीं हैं. एक प्राचार्य को कई महाविद्यालय का जिम्मा दे दिया जाता है. ऐसे में स्टूडेंट्स, युवा बेरोजगारी के कारण इधर-उधर भटक रहे हैं. झारखण्ड सरकार ने वादे तो बहुत किए थे लेकिन वादे को पूरा करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति किया है. सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार है. छात्रों का भविष्य अधर में लटकाने का भी प्रयास पूरे धड़ल्ले से झारखंड में किया जा रहा है. मौके पर अभाविप के राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य रोमा तिर्की, प्रदेश सह मंत्री शुभम राय, अभाविप के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रमेश उरांव सहित अन्य ने भी अपने विचार रखे. धरना प्रदर्शन के दौरान राजभवन के प्रतिनिधि मजिस्ट्रेट रामकुमार उरांव एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल से मिले. उनके 11 सूत्री मांगों के पत्र को स्वीकार करते हुए जल्द से जल्द इस पर कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया.
राजभवन जारी करे श्वेत पत्र
याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि पूरे झारखंड में शिक्षण व्यवस्था बदहाली की कगार पर है. राजभवन एवं साथ ही राज्य सरकार भी यह बताए कि ऐसी क्या मजबूरी है कि कुलपति नियुक्तियों को बीच में ही रोक दिया गया. राजभवन को इसे लेकर एक श्वेत पत्र जारी करके स्पष्टीकरण देना चाहिए. कुलपतियों की नियुक्ति की विज्ञापन निकलने के बाद भी 9 महीने से अभी तक कुलपतियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय हाशिए पर चला गया है. कुलपतियों की नियुक्तियां की विज्ञापन को निरस्त करना स्टूडेंट्स के सर्वांगीण विकास को प्रभावित करने का प्रयास है. 2007 के बाद किसी भी प्रकार की स्थाई नियुक्ति प्राध्यापकों की नहीं हुई है.
सभी महाविद्यालयों में 90% अस्थाई प्रभारी प्राचार्य के सहारे इसे चलाया जा रहा है. रांची विश्वविद्यालय में 1032 पोस्ट अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं पर अभी तक 686 पोस्ट रिक्त हैं. रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत 18 अंगीभूत महाविद्यालय हैं जिसमें तीन स्थाई प्राचार्य ही मौजूद हैं. छात्र संघ चुनाव न कराना, सीनेट, सिंडिकेट को बहाल न करना यहां के सत्ताधारी लोगों की नियत पर सवालिया निशान खड़ा करता है.
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