JharkhandRanchi

तीन तलाक पर कानून बनाना बेहतर प्रयास, कुप्रथा से मिलेगी मुक्ति : मिस्फिका हसन

Ranchi : त्वरित तीन तलाक देने को दंडनीय अपराध बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट के लाये अध्यादेश का प्रदेश भाजपा ने स्वागत किया है. पार्टी प्रवक्ता मिस्फिका हसन ने जहां इसे मुस्लिम महिलाओं की बेहतरी के लिए प्रधानमंत्री मोदी का बेहतर प्रयास बताया है, साथ ही इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप भी लगाया है. उन्होंने कहा कि बिल के कानून बन जाने से मुस्लिम समाज की पीड़ित महिलाओं को इस कुप्रथा से आजादी मिलना आसान हो सकेगा. मालूम हो कि बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के लिए एक अध्यादेश को मंजूरी दी है. प्रस्तावित अध्यादेश के तहत एक साथ तीन तलाक देना अवैध माना जायेगा. ऐसा करने पर दोषी पति को तीन साल तक कैद की सजा देने की बात भी अध्यादेश में कही गयी है.

इसे भी पढ़ें- BJP कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और आशा लकड़ा से ज्यादा तरजीह मिस्फिका को

स्वयं मुस्लिम समाज से आती हूं, समझती हूं दर्द

गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मिस्फिका हसन ने कहा कि तीन तलाक से मुस्लिम महिला समाज को आजादी दिलाने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. चूंकि वह स्वयं मुस्लिम समाज से आती हैं, ऐसे में मुस्लिम महिलाओं की उस पीड़ा को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं कि मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तीन तलाक कहकर कैसे मुस्लिम पुरुष उन्हें दर-ब-दर का जीवन जीने को विवश करते हैं. उन्होंने कहा कि तलाक देने के बाद उस महिला और उसके बच्चे के जीवन पर क्या असर पड़ेगा, उसका कोई भी सरोकार मुस्लिम समाज नहीं करता. अब सरकार जिस तरह से तीन तलाक को कानून बनाने जा रही है, उससे समाज की महिला को इस कुप्रथा से निजात मिल सकेगी.

इसे भी पढ़ें- सदर अस्‍पताल में इलाज नहीं होता, इस भ्रम को तोड़ना है : निधि खरे

वोट बैंक के लिए कांग्रेस ने की थी राजनीति

शाहबानो प्रकरण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इंदौर निवासी शाहबानो को उसके पति मोहम्मद खान ने तलाक दे दी थी. बाद में यह मामला शीर्ष कोर्ट तक पहुंचा. सुनवाई के बाद कोर्ट ने शाहबानो के हक में फैसला देते हुए मोहम्मद खान को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था. लेकिन, केस जीतने के बाद भी शाहबानो केस हार गयी. इसका कारण कांग्रेस पार्टी द्वारा इसपर की जानेवाली राजनीति रही है. उन्होंने बताया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के हितों की अनदेखी करते हुए वर्ष 1986 में ‘मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू डाइवोर्स’ कानून पास किया था. इस कानून के आने से भारतीय मुस्लिम महिलाओं को सबसे ज्यादा झटका लगा, क्योंकि कानून में मुस्लिम पुरुष को केवल तीन माह तक ही महिलाओं को जीवन भत्ता देने की बात कही गयी. उसके बाद से आज तक इन महिलाओं के हक के लिए लड़ाई जारी है, जिसे अब तक मोदी सरकार ने अंजाम तक पहुंचाया है.

इसे भी पढ़ें- बुंडू : डायन का आरोप लगाकर टांगी से मारकर महिला की हत्या

मुस्लिम महिलाओं के लिए बने कानून

मुस्लिम समाज में फैल रही इस कुप्रथा पर जोरदार प्रहार करते हुए मिस्फिका हसन ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के आत्मसम्मान, उनकी गरिमा और उन्हें सुरक्षित जीवन देने के लिए यह बहुत जरूरी है कि उक्त अध्यादेश को जल्द से जल्द कानून का रूप दिया जाये. अब जब भाजपा की मोदी सरकार ने ऐसा करने की पहल कर दी है, इससे उम्मीद बंधी है, जल्द ही देश की ऐसी पीड़ित महिला को लाभ मिल सकेगा.

Related Articles

Back to top button