
Ranchi: विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य के रांची, रामगढ़, कोडरमा, गिरिडीह समेत सभी जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. सभी जिलों में उत्साह का माहौल देखा गया. कई जगहों पर बारिश हो रही थी इसके बाद भी लोग मांदर के थाप पर थिरक रहे थे. वहीं स्कूलों में भी कई कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
रामगढ़ में सांस्कृतिक कार्यक्रम
रामगढ़ के छत्तरमांडू स्थित टाउन हॉल भवन में जिला स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में उपायुक्त, रामगढ़ चंदन कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में हिस्सा लिया. अपने संबोधन में उपायुक्त चंदन कुमार ने सभी को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज हमारे समाज की जड़ की तरह है और किसी भी समाज के विकास के लिए उसकी जड़ का मजबूत होना बेहद जरूरी है. मौके पर उपायुक्त ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से मानव सभ्यता के विकास में आदिवासी समाज के योगदान की जानकारी दी उपायुक्त ने कहा कि आदिवासी और प्रकृति एक दूसरे के पूरक हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर हम ध्यान दें तो हम जानेंगे कि आदिवासी समाज के रीति रिवाज, पर्व त्यौहार सहित धार्मिक मान्यताएं भी प्रकृति के संरक्षण से जुड़ी हुई है. विश्व आदिवासी दिवस मनाए जाने के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उपायुक्त ने कहा कि इस दिन को मनाने का उद्देश्य समाज के विकास में आदिवासी समूह के योगदान को समझने व यह आकलन करने की वर्तमान में आदिवासी समूह के लोगों की स्थिति कैसी हैं, कहीं वे किसी परेशानी में तो नहीं है या किस प्रकार से हम उनके जीवन को और भी बेहतर बना सकते हैं यह समझने की है. इस वर्ष आदिवासी दिवस के थीम पर प्रकाश डालते हुए उपायुक्त ने कहा कि वर्तमान समय में आदिवासी युवाओं पर यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे आत्मनिर्णय कर किस प्रकार से आदिवासी समाज का विकास सुनिश्चित करेंगे. मौके पर उपायुक्त में कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न विद्यालयों के बच्चों सहित जिले के सभी आदिवासी समूह के युवाओं से आदिवासी संस्कृति को संरक्षित कर और आगे ले जाने व समाज से विभिन्न कुरीतियां यथा अंधविश्वास, डायन प्रथा, हड़िया सेवन आदि को दूर करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाने की अपील की. साथ ही उपायुक्त ने कहा कि सरकार द्वारा आदिवासी समूह के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, अगर जिले के किसी भी क्षेत्र में लोगों को लगता है कि सरकार की योजनाएं धरातल पर कार्य नहीं कर पा रही है अथवा कोई अन्य समस्या है तो लोग इसकी जानकारी उपायुक्त कार्यालय आकर सीधे उन तक पहुंचा सकते हैं. जिला प्रशासन द्वारा इस दिशा में जरूर कार्य किया जाएगा.
चतरा में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
चतरा के कान्हाचट्टी प्रखंड मुख्यालय में निवास करने वाले आदिवासी परिवार द्वारा विश्व आदिवासी दिवस पर सीताराम शायल बगीचा में धूमधाम के साथ आदिवासी दिवस मनाया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ज़िप उपाध्यक्ष बिरजू तिवारी उपस्थित थे. मुख्य अतिथि बिरजू तिवारी ने मूसलाधार बारिश के बावजूद मांदर के थाप पर खूब थिरके वहीं उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व भर की आदिवासी समाज में जागरूकता और उनके अधिकारों की सुरक्षा को प्रेरित करने के उद्देश्य हर एक वर्ष विश्व आदि दिवस मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज हमारे पर्यावरण के मुख्य संरक्षक हैं. हमें पर्यावरण संरक्षण एवं अपनी संस्कृति के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलता है. हम सभी को एकजुटता के साथ मिलजुल कर समाज के उत्थान एवं विकास के बारे में सोचने की आवश्यकता है.

चक्रधरपुर में विश्व आदिवासी दिवस समारोह
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बुधवार को चक्रधरपुर प्रखंड के टोकलो हाई स्कूल मैदान में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे. विधायक सुखराम उरांव ने कहा कि समाज में शिक्षा की कमी के कारण आज अंधविश्वास फैल रहा है. उसे दूर करने के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति को शिक्षित होना पड़ेगा. तभी हमारा समाज के साथ साथ लोग आगे बढ़ेंगे. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित
पूर्व विधायक शशिभूषण सामड ने कहा कि आदिकाल से देश भर के आदिवासीयों को अपने स्वार्थ के लिए शोषण का शिकार बनाया गया है. युगों तक संघर्ष करने के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 13 सितम्बर 2007 को विश्व के आदिवासी अधिकारों की घोषणा की गई. तभी से समाज विश्व आदिवासी दिवस मना रही हैं. उन्होंने ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति, रिति रिवाज, कला संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सभी को एकजुट होना होगा.

गिरिडीह के गांवा में संकल्प सभा का आयोजन
विश्व आदिवासी दिवस को लेकर गिरिडीह के गांवा में संकल्प सभा का आयोजन हुआ. संकल्प सभा में गांवा और तिसरी समेत रामगढ़ और कई जिलों के आदिवासी समुदाय का जुटान हुआ. इस दौरान जंगल बचाओ आंदोलन समिति के तत्वाधान में गांवा में हेमंत सरकार के खिलाफ रैली भी निकाला गया. जिसमें काफी संख्या में आदिवासी समुदाय के युवाओं समेत महिलाएं और जंगल बचाओ आंदोलन के पदाधिकारी और सदस्य जुटे थे. गांवा में निकले इस बड़े रैली में आदिवासी समुदाय के लोगों ने हेमंत सरकार के साथ वन विभाग के विरोध में भी नारे लगाएं. रैली थाना मोड़ होते हुए पूरे गांवा का भ्रमण किया. मांदर के थाप के बीच आदिवासी समुदाय के लोग सड़को पर पांरपरिक नृत्य करते दिखे. इस दौरान मूषलाधार बारिश भी हो रही थी. लेकिन मूषलाधार बारिश के बीच आदिवासी समुदाय के लोग रैली में शामिल हुए. गांवा बाजार भ्रमण करते हुए रैली गांवा प्रखंड पहुंचा. जहां संकल्प सभा को लेकर जंगल बचाओ आंदोलन के ओम प्रकाश मांझी और सचिव हीरा लाल मुर्मु समेत अन्य वक्ता हेमंत सरकार पर जमकर बरसे. और कहा कि सत्ता मिलने के बाद हेमंत सरकार को अब आदिवासी हितों की चिंता नहीं रह गया है. इसी वजह से आदिवासी समाज के जमीनों को वन विभाग और भूमाफिया लूट रहे है. और सरकार के इशारे पर उनके अधिकारी भी भूमाफियाओं का पूरा सहयोग कर रहे है. जंगल बचाओ आंदोलन के पदाधिकारियों ने कहा कि जब जंगल बचेगा नहीं, तो आदिवासियों के पहचान को क्या होगा. हेमंत सरकार वृक्षारोपण करती है जंगल बचाने का आह्वान करती है. लेकिन जंगल में वृ़क्षारोपण पहले से किया हुआ है. अब क्या पौधारोपण करना. संकल्प सभा के माध्यम से जंगल बचाओ आंदोलन के वक्ताओं ने हेमंत सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ, तो हेमंत सरकार आने वाले चुनाव में अपना हश्र देखने के लिए तैयार रहे.






