
Ranchi : झारखंड हाइकोर्ट ने ईडी के गवाह अशोक यादव की सीसीए को अवैध करार देते हुए रिहा करने का आदेश दिया है. जस्टिश चंद्रशेखर की कोर्ट ने शुक्रवार को यह आदेश दिया है. अशोक यादव को सीसीए के तहत पिछले साल नजरबंद कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने उसके निवेदन पर विचार करने में 50 दिनों की देरी की जो कि गलत है. संथाल क्षेत्र में 1000 करोड़ के अवैध खनन मामले में ईडी ने जिस अशोक यादव को अपना गवाह बनाया था, उसे साहिबगंज पुलिस ने गिरफ्तार कर न सिर्फ जेल भेजा था, बल्कि झारखंड सरकार से उस पर सीसीए की अनुशंसा की थी और सीसीए लगवा भी दिया. अशोक यादव साहिबगंज के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सकरीगली पोस्ट स्थित समदा नाला का निवासी है. साहिबगंज के उपायुक्त व एसपी की अनुशंसा पर गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अशोक यादव को 15 दिसंबर तक के लिए क्राइम कंट्रोल एक्ट (सीसीए) के तहत निरुद्ध कर दिया था. बता दें कि तीन दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीसीए में साहिबगंज जेल में बंद पत्थर व्यवसायी व अवैध खनन मामले में ईडी के गवाह जयप्रकाश यादव उर्फ मुंगेरी यादव को रिहा किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुंगरी यादव को शाम 5 बजे तक जेल से रिहा कर सूचित करें. सुप्रीम के जजों की बेंच ने माना कि सीसीए द्वेषपूर्ण था और इसे खारिज कर दिया.
मुंगेरी यादव का करीबी है अशोक यादव
अशोक यादव पंकज मिश्रा के प्रतिद्वंद्वी मुंगेरी यादव का करीबी है. साहिबगंज क्षेत्र में 8 जुलाई 2022 को छापेमारी के बाद से ही साहिबगंज पुलिस भी सक्रिय हो गई. साहिबगंज पुलिस ने आर्म्स एक्ट के एक मामले में पहले 29 जुलाई को पत्थर किंग के नाम से जाना जानेवाले मुंगेरी यादव को गिरफ्तार किया था. 30 जुलाई को साहिबगंज पुलिस ने अशोक यादव को गिरफ्तार किया था. अशोक यादव को दाहू यादव के जहाज पर गोलीबारी मामले में साहिबगंज मुसफ्फिल थाने में दर्ज केस में गिरफ्तार किया गया था. उसपर आधा दर्जन केस है, जो बिजली चोरी, अवैध खनन व आर्म्स एक्ट से संबंधित हैं. अवैध खनन मामले में मनी लांड्रिंग के तहत अनुसंधान के दौरान ईडी ने 8 जुलाई 2022 को साहिबगंज में सीएम के बरहेट विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा व अन्य सहयोगियों से जुड़े 20 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी. इस छापेमारी में ईडी ने कुल 5.32 करोड़ रुपये नकदी बरामद की थी. करोड़ों के बैंकिंग लेन-देन व निवेश से संबंधित दस्तावेज भी मिले थे. इसके लिए ईडी ने विधिवत जब्ती सूची तैयार की थी. जब्ती सूची पर नियमत: गवाहों का दस्तखत होता है. ईडी के जब्ती सूची पर तब अशोक यादव ने गवाह के तौर पर अपना दस्तखत किया था.
इसे भी पढ़ें – ग्रीन कार्डधारी नहीं करे रहे राशन का उठाव, जिला प्रशासन ने की अपील, कहा- राशन उठायें अन्यथा स्वतः समाप्त हो जायेंगे कार्ड



