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गिरिडीह में मनरेगा योजना में गड़बड़ी मामले में जांच हुई तेज, बीडीओ और बीपीओ के साथ मुखिया भी जांच के दायरे में आए

मनोज कुमार पिंटू

Giridih: बीडीओ, बीपीओ, वेंडरों और मुखिया समेत रोजगार सेवकों के मिलीभगत ने गिरिडीह के मजदूरों से मनरेगा योजना से मिलने वाले रोजगार का अधिकार ही छीन लिया है. सदर प्रखंड में 7 करोड़ 88 लाख की गड़बड़ी एक बड़ा उदाहरण है तो दूसरी तरफ बिरनी के दलांगी पंचायत में बगैर डोभा निर्माण कराए ही 22 हजार की अवैध निकासी कर ली गई. सदर प्रखंड में 95 लाख के आवंटन के बाद बीडीओ, दो बीपीओ, रोजगार सेवक और मुखिया ने आपसी मिलीभगत कर सात करोड़ की अवैध निकासी कर ली. अब यह मामला चर्चा में है. इस मामले में दो बीपीओ हेमलता कुमारी और भीखदेव पासवान का तबादला कर दिया गया है तो वहीं बीडीओ को शोकॉज भी किया गया है.
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इस गड़बड़ी मामले की जांच तेज कर दी गई है. उम्मीद जताई जा रही है कि जांच रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में डीसी के टेबल पर होगा. हालांकि प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई है. सात करोड़ की अवैध निकासी मामले में सिर्फ बीडीओ, बीपीओ, रोजगार सेवक और पंचायत सचिव ही नहीं बल्कि सदर प्रखंड के कई मुखिया भी संदेह के घेरे में हैं. इस मामले में जांच के दौरान जांच टीम के पदाधिकारियों ने जब सदर प्रखंड के मंगरोडीह गांव में जांच किया तो अकेले मंगरोडीह पंचायत में ही करीब सवा सौ योजनाओं को लिए जाने का मामला उजार हुआ है. इन योजनाओं में बकरी शेड निर्माण, गौपालन शेड निर्माण के साथ मुर्गी पालन शेड निर्माण की योजनाएं भी शामिल है.

प्रशासनिक हलकों में सात करोड़ 88 लाख की गड़बड़ी इन योजनाओं से ही जुड़े होने की बात कही जा रही है. क्योंकि सवा सौ योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही पूरा कर लिया गया है. मनरेगा के एमवी बुक में दर्ज है लेकिन ना तो कहीं एक भी लाभुक ही दिखा और ना ही कोई योजना पूरे मंगरोडीह पंचायत में जांच टीम के सदस्यों को देखने को मिला. जबकि पूरे पंचायत में एक करोड़ 19 लाख की योजना की स्वीकृति की गई थी.

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