
Giridih: सम्मेद शिखर और आदिवासी समुदाय के जाहेर थान पूजन स्थल पारसनाथ पहाड़ का करीब दो हजार एकड़ का इलाका आग से झुलस रहा है. यह दावा गुरुवार को मधुबन के गेस्ट हाउस में हुए प्रशासनिक अधिकारियों, वाईल्ड लाईफ सेंचुरी और वन विभाग के पदाधिकारियों के साथ जैन और आदिवासी समाजिक संगठनों के हुए संयुक्त बैठक में किया गया. बैठक में डुमरी एसडीएम प्रेमलता मुर्मु, एसडीपीओ मनोज कुमार, डुमरी बीडीओ, सीओ के साथ पीरटांड के बीडीओ, सीओ और पीरटांड और मधुबन थाना प्रभारी दिलशन बिरुआं और वन विभाग के साथ वाईल्ड लाईफ सेंचुरी के भी पदाधिकारी समेत आदिवासी संगठन सांमता सुशार बेसी के सदस्य भी शामिल हुए. बैठक में फैसला लिया गया कि पारसनाथ पहाड़ में लगी आग को पूरी तरह से बुझाने के लिए तीन सौ युवाओं के दल को शुक्रवार की सुबह सारे संसाधन के साथ भेजा जाएगा। जो मकर संक्रान्ति मेला समिति से जुड़े है और पूरे पारसनाथ पहाड़ समेत तराई के इलाकों से अवगत हैं.
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इस संबंध में वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रवेश अग्रवाल ने कहा कि तीन सौ युवाओं को आग बुझाने के लिए जाल उपलब्ध कराएगा तो जैन संगठनों द्वारा भोजन और पानी की व्यवस्था कराई जाएगी. आदिवासी संगठन सांवता सुसार बेसी द्वारा युवाओं को कई और दुसरे संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही गई. वन विभाग के पदाधिकारियों ने बताया कि पूरा मधुबन और पारसनाथ का इलाका वाईल्ड लाईफ सैंचूरी क्षेत्र के तहत आता है लेकिन सहयोग वन विभाग की और से किया जाता है. बैठक में सांवता सुसार बेसी के पदाधिकारी और भाजपा नेता सिकंदर हेम्ब्रम ने आग पर काबू पाने के लिए फंड नहीं होने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकार को पत्र लिखा जाएगा.

जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से पारसनाथ पहाड़ और तराई के हिस्से में आग लगी हुई है. पहाड़ के कई हिस्से आग की चपेट में है. एक अनुमान के अनुसार करीब दो हजार एकड़ में आग फैल चुका है. पहाड़ में आग लगने को लेकर कई चर्चाएं हैं जिसमें पहाड़ के उपर लगे पुतर के पेड़ का हवा में लहराने के कारण उसके रगड़ाने से चिगांरी निकलना, महुआ चुनने को लेकर आग लगाना, तराई वाले इलाकों में खेती किए जाने के दौरान पत्तों को झड़ने के बाद उसमें आग लगाने की बात सामने आई है.




