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लाह की खेती को कृषि का दर्जा, किसानों को मिलेगा लाभ

दस हजार मीट्रिक टन का उत्पादन होता है लाह का

Ranchi: राज्य सरकार ने लाह की खेती को कृषि का दर्जा दिया है. खेती का दर्जा मिलने से किसानों को काफी फायदा होगा. लाह का व्यवसायिक उपयोग को और बढ़ावा मिलेगा. झारखंड लाह के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में है. जहां औसतन प्रतिवर्ष लगभाग 10 हजार मीट्रिक टन लाह का उत्पादन होता है. राज्य के लगभग चार लाख ग्रामीण परिवार जिसमें जनजातीय समूह के अधिक है वे इससे जुड़े हैं. कृषि से होने वाली आय का 25-30 प्रतिशत हिस्सा उन्हें लाह की खेती से होता हे. 19 लाह प्रक्षेत्र जिला मुख्य रूप से हैं. इनमें खूंटी, गुमला,प.सिंहभूम, पलामू, गढ़वा, सरायकेला-खरसावां एवं लातेहार इत्यादि प्रमुख जिला है.

ये मिलेंगे लाभ

  • राज्य के अंतर्गत लाह खेती से जुड़े चार लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को लाह कृषक के नाम से संबोधित किया जायेगा.
  • लाह खेती से जुड़े ग्रामीणों को भी मौसम आधारित फसल बीमा योजना से जोड़ा जायेगा.
  • लाह खेती से जुड़े ग्रामीणों को भी बैंकों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ दिया जायेगा.
  • झारखंड राज्य फसल राहत योजना से लाह कृषकों को लाभुक के रूप में जोड़ा जायेगा.
  • वन भूमि पर पारस्परिक तौर पर लाह की खेती करने एवं वन अधिकार अधिनियम 2008 के अंतर्गत पात्रता रखने वाले अनुसूचित जनजाति, व वनों आधारित लोगों को वन अधिकार दिया जायेगा. ग्रामीण स्तर पर लाह आधारित कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया जायेगा.

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