
Sanjay Prasad
Jamshedpur : टाटा स्टील के संवाद में शिरकत करने ब्राजील से शहर पहुंची जुलियाना सैन्जियोन ने कहा कि दुनिया भर में जनजातीय समुदाय की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है. पेशे से पत्रकार रही और अब स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ कैंपिनस साओ पाओलो (ब्राजील) में प्रोफेसर जुलियाना ने कहा कि वह अमेजन के जंगलों में रहने वाले इंडीजेनस (देशज) लोगों तक शिक्षा को पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं. अपनी यूनिवर्सिटी के दो देशज विद्यार्थियों को लेकर संवाद में शिरकत करने पहुंची जुलियाना ने कहा कि स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ कैंपिनस साओ पाओलो (ब्राजील) पब्लिक यूनिवर्सिटी है और हम यहां पर ऐसे लोगों को फ्री एजुकेशन देते हैं, ताकि उन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जा सके. उन्होंने कहा कि यह देशज लोग भले ही जंगलों में रहते हैं, लेकिन वे गरीब नहीं है. वे अपनी परंपरा और संस्कृति से समृद्ध है और सरल जिंदगी जीते हैं, जो शहरों में संभव नहीं है.
हमने आधुनिकता का मतलब टेक्नोलॉजी को समझ लिया है
बकौल जुलियाना, भारत और ब्राजील में कई तरह की समानताएं हैं. बावजूद बुनियादी फर्क भी है. आधुनिकता को हम टेक्नो वर्ल्ड मानते हैं, जो अत्याधुनिक गजेट्स से लैस हो. इन इंडीजेनस लोगों के पास भले ही तकनीक की पहुंच नहीं है, लेकिन उनका प्रकृति और कुदरत के साथ जो संबंध है, वह कमाल का है. आज उपभोक्तावादी दुनिया में जो समस्याएं हैं, उसका समाधान प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही संभव है. ऐसे लोगों को आज सशक्त करने की जरूरत है. ऐसे में संवाद का मंच दुनिया भर के जनजातीय लोगों की परम्परा, रहन सहन और जीवन शैली को एक दूसरे के साथ साझा करने का मौका देता है. यही नहीं यह मंच इनकी भाषा और संस्कृति को भी उन्नत और वैज्ञानिक बनाने में भूमिका निभा रहा है.
अमेजन के जंगल की कई जनजातियां विलुप्त होने के कगार पर
ब्राजील में मैन ऑफ द होल नाम से मशहूर और अमेज़न में अपनी जनजाति के आखिरी सदस्य का पिछले दिनों निधन हो गया था. उनकी मृत्यु को लेकर ब्राजील में काफी चर्चा रही. कई लोगों ने ब्राजील के अमेज़ॅन जनजातियों की एक पूरी पंक्ति के खत्म होने पर शोक व्यक्त किया थाऔर इस नुकसान से समग्र संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर भी इशारा किया था. अमेजन के जंगलों में रहने वाले एंडियो डू बुराको को “मैन ऑफ द होल” के रूप में जाना जाता था. उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं था. वह 26 साल से जंगल में अकेले रह रहे थे. अगर कोई उनसे संपर्क बनाने की कोशिश करता, तो उस पर तीर से हमला होता था. वह अपनी जनजाति का अंतिम था और इसलिए एक और जनजाति विलुप्त हो गयी.
2019 में पहली बार आयी थी संवाद में
जुलियाना ने बताया कि वह दूसरी बार संवाद में हिस्सा लेने आयी है. इसके पहले 2019 में कोरोना के जस्ट पहले संवाद में शिरकत करने आई थी. कहा- इसमें भाग लेना उनके लिए गौरव की बात है, क्योंकि हम एक दूसरे के नॉलेज को शेयर करते हैं. हर समुदाय की बेस्ट प्रैक्टिसेस को हम अपने यहां अपनाते हैं.
लोकतंत्र के लिए खतरा थे बोल्सोनारो
पत्रकार रही जुलियाना ने अपने देश की राजनीतिक स्थिति पर भी बेबाक टिप्पणी की. उन्होंने दक्षिणपंथी विचारधारा वाले पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और कहा कि वे प्रेस की आजादी को सम्मान नहीं देते थे. उनसे ब्राजील की जनता आजिज आ गई थी. यही कारण है कि हाल ही में हुए चुनाव में लूला डिसिल्वा जीत कर आए और नये राष्ट्रपति बनें.
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