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40 रूसी फाइटर विमानों को तबाह करनेवाला, यूक्रेन का ‘घोस्ट ऑफ कीव’ देश के लिए हुआ कुर्बान

रूसी एयरफोर्स के लिए दहशत का पर्याय बनने वाले पायलट का नाम है स्टीफन ताराबल्का

Kyiv : यूक्रेन का वो लड़ाकू पायलट, जिसमें युद्ध में रूसी वायुसेना के छक्के छुड़ा दिए और जो रूसी एयरफोर्स के विमानों के लिए काल बन गया था, आखिरकार अपने देश के लिए कुर्बान हो गया. ऐसा दावा किया जाता है, कि यूक्रेन के इस पायलट ने युद्ध शुरू होने पर ही ऐसी तबाही मचानी शुरू कर दी थी, कि उसे यूक्रेन की सरकार ने ‘घोस्ट ऑफ कीव’ की उपाधि दे दी.

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दो माह से रूसी एयरफोर्स के लिए बना हुआ था सरदर्द

द टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के बहादुर फाइटर पायलट, जो पिछले दो महीने से लगातार रूसी एयरफोर्स को टक्कर दे रहा था और जिसे ‘घोस्ट ऑफ कीव’ के नाम से जाना जाता था, और कथित तौर पर जिसने 40 से ज्यादा रूसी विमानों को मार गिराया था, वो लड़ाई में मारा गया है.

मौत के बाद ‘घोस्ट ऑफ कीव’ की पहचान की गई है और रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक यूक्रेन की आसमान में रूसी एयरफोर्स के लिए दहशत का पर्याय बनने वाले इस पायलट का नाम स्टीफन ताराबल्का था और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टीफन उस वक्त मारे गये, जब वो मिग-29 उड़ा रहे थे और दुश्मन का एक गोला उनके विमान से टकरा गया.

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पहले ही दिन मार गिराये थे रूस के 6 फायटर जेट्स

स्टीफन ताराबल्का ने जब युद्ध शुरू होने के पहले ही दिन रूस के 6 फायटर जेट्स को मार गिराया था, उसके बाद उन्हें यूक्रेनी सेना की तरफ से ‘गार्डियन एंजल’ का खिताब दिया गया था, लेकिन उनकी पहचान गुप्त रखी थी. लेकिन, यूक्रेनी मीडिया और खुद यूक्रेनी सरकार ने पायलट स्टीफन ताराबल्का को ‘घोस्ट ऑफ कीव’ कहना शुरू कर दिया था और उनकी पहचान एक काल्पनिक बना दी गई थी.

लोगों ने उन्हें ‘कीव का भूत’ कहना शुरू कर दिया था और ‘यूक्रेनी सरकार के आधिकारिक ट्वीट में कहा गया है कि वह पहले दिन से ही रूसी विमानों पर हमला करने के लिए रूसियों के लिए एक बुरा सपना बन गये थे.

वहीं, रूस के जनरल स्टाफ ने भी मिग-29 के कॉकपिट में बैठे अपने फायटर पायलट की तस्वीर पोस्ट की है, जिसमें उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई है.

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मरणोपरांत ऑर्डर ऑफ द गोल्डन स्टार सहित कई सम्मान

स्टीफन ताराबल्का यूक्रेनी एयरफोर्स में मेजर थे और मरनोपरांत उन्हें यूक्रेन का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान ऑर्डर ऑफ द गोल्डन स्टार, यूक्रेन के हीरो के खिताब से सम्मानित किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके परिवार में उनकी पत्नी ओलेनिया और आठ साल का बेटा यारिक है.

द टाइम्स के अनुसार, मेजर ताराबल्का, पश्चिमी यूक्रेन के कोरोलिव्का के छोटे से गाँव में एक मजदूर परिवार में पैदा हुए थे. वह बचपन से ही पायलट बनना चाहते थे, क्योंकि वह अपने गांव के ऊपर आसमान में फाइटर जेट्स को उड़ाना चाहते थे.

वहीं, मेजर स्टीफन ताराबल्का के परिवार ने कहा है कि, यूक्रेनी सेना उन्हें उनके बेटे की अंतिम उड़ान या उनकी मृत्यु का कोई विवरण नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि, ‘हम जानते हैं कि वह एक मिशन पर था. और उसने मिशन पूरा किया, और यह उसका काम था. फिर वह हमारे पास वापस नहीं लौटा. हमारे पास उसकी बस यही जानकारियां हैं’.

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फर्जी वीडियो भी हो रहे थे वायरल

आपको बता दें कि, युद्ध के शुरूआती दिनों में ही ‘घोस्ट ऑफ कीव’ के नाम से प्रसिद्ध हो चुके अज्ञात पायलट को लेकर कई वीडियो वायरल किए जा रहे थे, जिनमें से ज्यादातर वीडियो फर्जी थे. एक वीडियो में दावा किया गया था कि, ‘घोस्ट ऑफ कीव’ ने एक साथ 6 रूसी विमानों को मार गिराया है और वो रूसी सैनिकों पर मौत बनकर बरस रहा है.

उस वक्त किसी को पता नहीं था, कि आखिर ‘घोस्ट ऑफ कीव’ कौन है, क्या वो असली भूत है या फिर वो कहां का रहने वाला है, लेकिन कुछ दिनों के बाद दावे किए जाने लगे, कि ‘घोस्ट ऑफ कीव’ कुछ और नहीं, बल्कि यूक्रेन का एक बहादुर पायलट था, जो रूसी सैनिकों पर मौत बनकर बरस रहा था.

MiG-29 Fulcrum का फाइटर पायलट

घोस्ट ऑफ कीव’ के नाम से मशहूर हो चुके मेजर स्टीफन ताराबल्का MiG-29 Fulcrum विमान उड़ाते थे और अपने इसी पुराने फाइटर विमान के जरिए वो रूसी विमानों पर कहर बनकर बरस रहे थे. उन्होंने रूस के बेहद खतरनाक माने जाने वाले एसयू-35 फाइटर जेट को भी मार गिराया था. जो काफी खतरनाक माना जाता है.

इसीलिए उन्हें ‘घोस्ट ऑफ कीव’ का उपमान दिया गया था और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार किसी पायलट को ‘घोस्ट ऑफ कीव’ का उपनाम दिया गया था.

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