JamshedpurJharkhandJharkhand StoryKhas-Khabar

Success Stories : मजदूर से मालिक का सफर, जाने रूपाली मंडी की सफलता की कहानी

Jamshedpur : विपरीत परिस्थितियों में भी जो हार नहीं मानते उनके लिए आपदा भी अवसर बन जाती है. कुछ ऐसी ही कहानी है झारखंड के पूर्वी स‍िंहभूम ज‍िले के धालभूमगढ़ प्रखंड के रावतारा गांव निवासी रूपाली मंडी की, जिन्‍होंने इच्छाशक्ति से मजदूर से मालिक तक का सफर तय क‍िया है. दरअसल, कोरोना ने ईंट -भट्ठे में काम करनेवाली रूपाली मंडी का रोजगार छीन लिया. वहीं रूपाली के पति सूर्या मंडी, जो बंगलुरू में दैनिक मजदूर के रूप में काम करते थे. उन्हें भी वापस अपने घर लौटना पड़ा.
हालांकि, महामारी के दौरान अपने गांव में जोहार परियोजना के निर्माता समूह का हिस्सा रहने के कारण बेरोजगारी और आर्थिक समस्याओं के बीच रूपाली ने पति के साथ बातचीत कर अपनी 40 डिसम‍िल भूमि में विभिन्न फसलों की खेती करने का फैसला किया तथा उच्च मूल्य की फसलों की खेती के लिए पट्टे पर 110 डिसम‍िल खाली जमीन लेकर बहुफसली खेती करना शुरू किया, जो आर्थिक दृष्टि से काफी लाभदायक सिद्ध हुआ है. आज जेएसएलपीएस द्वारा संचालित जोहार परियोजना से मिले सहयोग से रूपाली तथा उनके पति को दैनिक मजदूर से प्रगतिशील कृषक की पहचान मिली है.
बहुफसली खेती ने दिखाया लखपति बनने का सपना, मजदूर से बनीं मालिक
रूपाली मंडी ने अपने समर्पण, कड़ी मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ जोहार परियोजना से मिली वित्तीय सहायता के दम पर शुरू में 62 हजार रुपये की लागत से खेती शुरू की थी. इससे 13 हजार रुपये का लाभ हुआ. यह सिर्फ शुरुआत थी. रूपाली के साथ कापरा हेम्ब्रम, शर्मिला हेम्ब्रम और डांगी टुडू एक टीम के रूप में काम कर रही हैं. आज इन्होंने लगभग 30 डिसमिल में मटर, 30 डिसमिल में मिर्च व शिमला मिर्च, 10 डिसमिल में गाजर मिलाकर कुल 70 डिसमिल में खेती की है. बाकी 80 डिसम‍िल जमीन में मटर, फूल गोभी, पत्ता गोभी, करेला और ब्रोकली की अंतर-फसलीय खेती कर रही हैं.
रूपाली ने कभी नहीं सोचा था लोग उससे सिखने आयेंगे
रूपाली मंडी ने बताया कि इन फसलों को बाजार में बेचे जाने पर लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये का अपेक्षित लाभ होगा. रूपाली गर्व से बताती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि लोग उनकी मेहनत को देखने आयेंगे और उससे सीखने की कोशिश करेंगे. दरअसल, राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को वैज्ञानिक खेती से जोड़कर अत्याधुनिक प्रशिक्षण के जरिए आमदनी में बढ़ोतरी के प्रयास किये जा रहे हैं. जेएसएलपीएस के तहत जोहर परियोजना को इसी उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़कर उनकी आमदनी में बढ़ोत्तरी की जा सके.
जेएसएलपीएस से उच्च मूल्य वर्धित फसलों की खेती का प्रशिक्षण
कृषि उत्पादकता में सुधार के कारकों में से एक इन ग्रामीण परिवारों और उत्पादक समूहों को उच्च मूल्य वर्धित फसलों जैसे (फल, सब्जियां, मसाले आदि) की खेती के लिए समर्थन और मार्गदर्शन करना है. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की जोहार परियोजना उच्च मूल्य वर्धित कृषि (HVA), सिंचाई योजनाओं की स्थापना, गैर-काष्ठ वन उपज (NTFP) प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले ऐसे उत्पाद जो एक विशेष मौसम पर निर्भर होते हैं. पशुधन और मत्स्य विकास जैसे कई डोमेन में सहायता प्रदान करके किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से काम कर रही है.

Sanjeevani

ये भी पढ़ें- GC Jain Inter School Cricket : रोमांचक मुकाबले में एमएल रुंगटा विद्यालय ने डीपीएस इंटर कॉलेज को एक रन से हराया

MDLM

Related Articles

Back to top button