
Ranchi: झारखंड विधानसभा के जारी सत्र के दौरान सोमवार को सदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि कोल् कंपनियां रैयतों से कोल् बेरिंग एक्ट के तहत जमीन लेती है. यह भारत सरकार का कानून है, राज्य सरकार का नहीं. पूर्व की सरकार ने रैयतों की जमीन वापसी का कानून नहीं बनाया था बल्कि लैंड बैंक में खाली पड़ी जमीन को रखने का निर्णय लिया था. कहा कि रैयतों की जमीन वापसी के मामले पर कोल बेरिंग एक्ट एवं भूमि अधिग्रहण कानून का विस्तृत अध्ययन कर वैधानिक राय लेने के बाद सरकार निर्णय लेगी.
विधायक ढुल्लू ने उठाया था मामला
विधायक ढुल्लू महतो ने यह मामला मुख्यमंत्री प्रश्नकाल में उठाया था. विधायक ने कहा था कि bccl, ecl सहित अन्य कोल् कंपनियों द्वारा रैयतों से जमीन तो ली जाती है लेकिन उन्हें मुआवजा और नौकरी नहीं दी जाती है. साथ ही जिस जमीन का उपयोग नहीं होता वह रैयतों को वापस भी नहीं की जाती है. इतना ही नहीं खनन के बाद बिना भराये जमीन को छोड़ दिया जाता है जिस वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है.
माइका चुनने वालों को मिलेगा संरक्षण
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधायक बंधु तिर्की के सवाल के जवाब में कहा कि सरकार माइका चुननेवालों को संरक्षण देगी. इसके लिए सरकार ने नीति निर्धारित कर ली है. इसे अधिसूचित भी कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि नई नीति से जहां माइका चुनने वालों को फायदा होगा वहीं कालाबाजारी भी रुकेगी.
शिक्षकों के अंतर जिला ट्रांसफर पर नीति जल्द
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार बहुत जल्द प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षको के अंतरजिला ट्रांसफर पर नीति बनाने जा रही है. यह काम आखरी चरण में है. बहुत जल्द नीति की घोषणा की जाएगी. मुख्यमंत्री भाजपा विधायक अनंत ओझा के सवाल का जवाब दे रहे थे.




