
Naveen Sharma
Ranchi : देश के पांच राज्यों उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव हुए हैं. इनकी मतगणना आज गुरुवार सुबह शुरू हुई. इन पांचों राज्यों में सबसे अधिक चौंकाने और उठापटक वाले नतीजे पंजाब से आते दिख रहे हैं. अभी तक के रुझानों में पांच में से चार राज्यों में भाजपा ने बाजी मार ली है. वहीं पंजाब में आप की झाडू कई दिग्गजों राजनीतिक को पटकनी देते हुए क्लिन स्वीप करती नजर आ रही है.
यूपी में भाजपा की लगातार वापसी के ये हैं कारण
उत्तर प्रदेश में 268 सीटों पर बढ़त बना कर भाजपा के योगी आदित्यनाथ फिर से देश की सबसे ब़ड़ी आबादी वाले राज्य के लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनते नजर आ रहे हैं. यूपी में 403 सीटें हैं. उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत के प्रमुख कारणों में राम मंदिर का निर्माण शुरू होने, बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर सहित पूरे शहर का कायाकल्प करने तथा कड़ी विधि व्यवस्था को माना जा सकता है.
योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में कई माफिया, डॉन और बाहुबली नेताओं जैसे मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और आजम खान पर नकेल कसने औऱ उन्हें जेल में डालने की वजह से योगी की छवि एक मजबूत मुख्यमंत्री के रूप में बनी थी जिसका मतदाताओं पर अच्छा प्रभाव पड़ा और इसका लाभ भी चुनाव में मिला.
इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लार्जर इमेज का लाभ भी योगी को मिला. उत्तर प्रदेश के चुनाव में भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंकी थी इसकी वजह से भी पार्टी को दोबारा सत्ता में आने का मौका मिला है.
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 125 सीटों पर बढ़त बनाकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती नजर आ रही है. कांग्रेस, मायावती की बसपा और अन्य छोटी पार्टियों औऱ निर्दलीयों को महज 3-3 सीटों पर बढ़त दिखाई दे रही है.
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उत्तराखंड में भगवा रंग
उत्तराखंड में भी फिर से भाजपा का भगवा ध्वज लहराता नजर आ रहा है. यहां की कुल 70 सीटों वाली विधानसभा में 41 सीटों पर बढ़त बना कर भाजपा स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाती नजर आ रही है. कांग्रेस 26 सीटों पर आगे चल रही है.
मणिपुर में भी भाजपा आगे
मणिपुर में भी भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है. यहां की कुल 60 सीटों में से 31 सीटों पर बढ़त बनाकर भाजपा सबसे आगे चल रही है. कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटों पर बढ़त हासिल है. एनपीपी को 6 तथा अन्य को 11 सीटों पर बढ़त हासिल है.
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गोवा में भाजपा को 18 सीटों पर बढ़त
गोवा में भी कुल 40 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा 18 सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है. वहीं कांग्रेस को सिर्फ 12 सीटों पर बढ़त हासिल है. आप को भी यहां दो सीटों पर बढ़त मिली है. वहीं टीएमसी सहित अन्य उम्मीदवार 8 सीटों पर आगे नजर आ रहे हैं.
पंजाब में कांग्रेस को करीब 50 सीटों का नुकसान
पंजाब में दोपहर एक बजे तक के मिले रुझानों के अनुसार दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी पंजाब में 91 सीटों पर बढ़त बनाते हुए दो तिहाई से भी अधिक सीटें हासिल करती हुई दिख रही है. आप पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे भगवंत मान जल्द ही पंजाब के नये मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए नजर आयेंगे.
वहीं कांग्रेस महज 17 सीटों पर ही आगे चल रही है. एक सीट पर अन्य को बढ़त हासिल है. पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों से तुलना करें तो कांग्रेस को करीब 60 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है.
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पंजाब में कांग्रेस के पतन की कहानी
पंजाब में सबसे अधिक दुर्गति सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की होती नजर आ रही है. वर्ष 2017 में कैप्टेन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पार्टी ने कुल 117 सीटों में से 77 सीटें हासिल कर स्पष्ट बहुमत पाकर मजबूत सरकार बनायी थी. लेकिन इस बार चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी कलह शुरू हो गयी थी.
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मेन विलेन नवजोत सिद्धू

पंजाब में कांग्रेस की इस बार हुई दुर्दशा के लिए क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. सिद्धू के संबंध पंजाब के सीएम कैप्टेन अमरिंदर सिंह से खराब हुए तो सिद्धू ने पहले कांग्रेस आलाकमान को उल्टी पट्टी पढ़ाकर कैप्टेन को मुख्यमंत्री पद से हटवाया था. सिद्धू खुद पंजाब के सीएम बनने की फिराक में थे लेकिन जब उनकी खुद की दाल नहीं गली तो चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया.
इस दौरान नवजोत सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. इसकी वजह से पार्टी में गुटबाजी काफी तेज हो गयी. मजबूर होकर कैप्टेन अमरिंदर सिंह को कांग्रेस पार्टी भी छोड़नी पड़ी थी. सिद्धू की नये सीएम चन्नी से भी नहीं पटी क्योंकि सिद्धू बहुत बड़बोले और अंहकारी रूख दिखाते नजर आते रहे हैं.
कई गुटों में बंटी कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिराया और मतदाताओं को भी ये संकेत दिया की कांग्रेस अब राज्य में नेतृत्व करने लायक पार्टी नहीं रह गयी है.
खैर, भाजपा और शिरोमणी आकाली दल के गठबंधन ने इस मौके का लाभ उठाने की कोशिश की लेकिन ये उतना लाभ नहीं उठा पाये. ये गठबंधन पिछले चुनाव में 18 सीटें लाया था और इस बार महज 8 सीटों पर ही बढ़त बना पाया है.
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आप ने दिखाया जलवा, चार गुना से अधिक सीटों बढ़त बनायी
अरविंद केजरीवाल की पार्टी दिल्ली के बाद जिस दूसरे राज्य में सबसे अधिक मजबूत स्थिति में थी वो पंजाब ही है. 2017 के विधानसभा चुनाव में भी आप पार्टी ने 22 सीटें हासिल कर अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करायी थी. वहीं इस बार कांग्रेस के कलह ने आप को सुनहरा मौका दिया.
इस मौके का आप ने जबर्दस्त फायदा उठाया और अपनी सीटों में चार गुना से भी अधिक वृद्धि कर 90 सीटों में बढ़त बना ली है.
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