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झारखंड की 31 में से 20 जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी, सुरक्षा पर बना रहता है खतरा

Chandi Dutta Jha

Ranchi: राज्य के जेलों में बंदियों के बीच बवाल की खबरें कई बार सामने आ चुकी है, जिन्हें काबू करने में पुलिस के भी पसीने छूट जाते हैं. जेल में सुरक्षा व्यवस्था को और भी चौकस करने के दावे होते हैं, लेकिन इसकी असल वजह के बारे में गंभीरता से सोचने तक को कोई तैयार नहीं हैं.

प्रदेश में सेंट्रल जेल, ओपेन जेल, डिस्ट्रिक जेल और सब जेल को मिलाकर 31 जेल है. दरअसल, प्रदेश की 20 जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों को रखा गया है. इन 20 जेलों की 8511 कैदी रखने की क्षमता है, लेकिन 12366 कैदी को रखा गया है. इन बंदियों में शातिर अपराधियों से लेकर कई खूंखार नक्सली भी शामिल हैं. बड़ी वारदात हो जाए तो सुधार के दावे होते हैं.

हकीकत यह है कि प्रदेश के अधिकतर जेलों में क्षमता से अधिक बंदी है. इससे न तो बुनियादी सुविधाएं मिल पाती है, न पुख्ता सुरक्षा. आलम यह है कि मामूली सुविधाओं के लिये भी कई बार बंदी आपस में भीड़ जाते हैं. कई बार यह भिड़ंत खूनी संघर्ष में बदल जाती है. बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का ही आलम है कि कई बंदी गंभीर बीमारियों से ग्रसित होकर अपनी जान तक गंवा चुके हैं. जेलों में बढ़ती भीड़ से हालात कब बेकाबू हो जाये और इसका क्या अंजाम होगा, इसे लेकर प्रशासन का मौन रहना चिंताजनक है.

325 कैदी की क्षमता वाले सब जेल बरही में है 7 कैदी

प्रदेश की ज्यादातर जेलों में हालत भले ही बदतर है, लेकिन कुछ जेल ऐसे भी हैं जहां क्षमता से कम कैदी बंद हैं. राज्य में 11 जेल ऐसे ऐसे भी है जिसमें क्षमता से कम कैदी को रखा गया है. 8910 क्षमता वाली इस 11 जेल में 7694 कैदी को रखा गया है. जिसमें हजारीबाग जिले के बरही स्थित सब जेल में 325 कैदी रखने की क्षमता है, लेकिन वहां मात्र 7 कैदी को रखा गया है. इसके अलावे 3666 कैदी की क्षमता वाले रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केद्रीय कारावास में 3560 कैदी को रखा गया है.

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हजारीबाग स्थित सेट्रल जेल में 1863 कैदी को रखा गया है. जबकि इसकी क्षमता 1990 कैदी रखने की है. 435 कैदी रखने की क्षमता रखने वाले चास जेल मे 396 कैदी को रखा गया है. साहेबगंज जेल की क्षमता 225 कैदी रखने की है लेकिन वहां 196 कैदी को रखा गया है. घाटशिला जेल में 325 कैदी की क्षमता है लेकिन वहां 303 कैदी को रखा गया है. मधुपुर में 473 कैदी की क्षमता है. वहां 306 कैदी को रखा गया है. इसी तरह रामगढ़ और तेनुघाट में 325 और 300 कैदी रखने की क्षमता है. लेकिन वहां 262 और 263 कैदी को रखा गया है.

चतरा, देवघर, लातेहार, गुमला और गढ़वा जेल का हाल बेहाल

जेल में उपद्रव होने पर प्रदेश की जेलों के हालात पर जिम्मेदार चिंता जताते हैं, लेकिन समय के साथ ही उनकी चिंता मौन में बदल जाती है. दरअसल, बंदियों की बहुतायत से जेलें अक्सर सुलग उठती है. झारखंड की जेलों के ताजा आंकड़े के अनुसार प्रदेश के कुल 31 कारागारों में 7421 बंदियों को रखने की क्षमता है. लेकिन, इसके विपरीत वर्तमान में इन जेलों में 20060 कैदी बंद हैं. इनमें 5218 बंदी दोषसिद्ध व 14882 बंदी विचाराधीन हैं. प्रदेश के जेलों में चतरा, देवघर, लातेहार, गुमला और गढ़वा जेल का हालत बेहद खराब है. इस जेल में 1191 बंदियों को रखने की क्षमता है. लेकिन, बावजूद इन जेलों में 2803 बंदी बंद हैं.

20060 में 5218 ही सजायाफ्ता, 14842 अंडर ट्रायल कैदी है बंद

राज्य के विभित्र जेलों में 20060 कैदी बंद है. जिसमें से 5218 को सजा सुनायी गयी है. बाकी 14842 कैदी अंडर ट्रायल हैं. अंडर ट्रायल के लिए राज्य के विभित्र जेलों में 14842 कैदी बंद हैं, जिसमें बिरसा केन्द्रीय कारा में सबसे अधिक 2118, घाघडीह में 861, खूंटी में 716 कैदियों का अंडर ट्रायल चल रहा है. रिपोर्ट 7 मार्च का है.

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