
Jamshedpur : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तीन कृषि कानूनों को वापस लिये जाने व रद्द करने की घोषणा से स्प्ष्ट हो गया कि जनांदोलन से बड़ा कुछ भी नहीँ है. यह किसानों और लोकतंत्र की जीत है. राष्ट्रीय झारखंड संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सह अधिवक्ता दिल बहादुर ने कहा कि लोकतंत्र में अहंकार और तानाशाही का कोई स्थान नहीं है. किसी को भी इस वहम में नहीं रहना चाहिए कि बहुमत मिल जाने से जनविरोधी नीतियों या कानून बनाने का हक मिल जाता है. भारत का लोकतंत्र बहुत मजबूत और परिपक्व हो चुका है. जनविरोधी नीति का विरोध करने का जनता को संवैधानिक अधिकार मिला है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि भले ही आगामी यूपी, पंजाब के चुनाव को देखते हुए किसान विरोधी कानूनों को रदद् करने का फैसला लिया गया है, लेकिन भाजपा को यह सबक मिल गया कि जनांदोलन को कुचलना और जनता के आवाज को दबाना लोकतंत्र में आसान नहीं है. बहादुर ने किसान आंदोलन के दौरान मारे गए शहीदों के प्रति संवेदना और श्रद्धांजलि प्रकट करते हुए कहा कि उन शहीद किसानों के परिवारों को न्याय और उचित मुआवजा देने की सरकार से मांग की है. सरकार को किसानों से वार्ता करनी चाहिए और किसानों के हित मे कानून बनानी चाहिए.
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